प्रधानमंत्री Narendra Modi की संभावित इजराइल यात्रा से पहले भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अहम कूटनीतिक संकेत दिया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जारी उस संयुक्त बयान का समर्थन किया है जिसमें वेस्ट बैंक में इजराइल द्वारा नियंत्रण मजबूत करने की कार्रवाइयों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
यह बयान 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा जारी किया गया है। इसमें United Kingdom, France, Germany और Russia जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। भारत ने डेडलाइन समाप्त होने से ठीक पहले इस बयान पर समर्थन दर्ज कराया।
बयान में कहा गया है कि वेस्ट बैंक में की जा रही एकतरफा कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही 1967 के बाद से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों, जिनमें पूर्वी यरूशलेम भी शामिल है, वहां की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति में बदलाव के प्रयासों का विरोध किया गया है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र की अंडर सेक्रेटरी जनरल Rosemary DiCarlo ने भी चेतावनी दी है कि हालिया कदम ‘डि-फैक्टो एनेक्सेशन’ की दिशा में बढ़ते संकेत दे रहे हैं। मामला अब United Nations Security Council के समक्ष भी चर्चा का विषय बन चुका है।
🔎 भारत की संतुलित नीति
भारत और Israel के बीच पिछले एक दशक में रक्षा और तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। हालांकि भारत पारंपरिक रूप से ‘दो-राष्ट्र समाधान’ का समर्थन करता आया है — जिसमें एक स्वतंत्र फिलिस्तीन और सुरक्षित सीमाओं के भीतर इजराइल, दोनों का शांतिपूर्ण अस्तित्व सुनिश्चित हो।
भारत का ताजा रुख इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नई दिल्ली रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाए रखने की नीति पर कायम है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रस्तावित इजराइल यात्रा के दौरान क्या यह मुद्दा बातचीत का हिस्सा बनता है और क्या भारत पश्चिमी एशिया में एक सक्रिय और संतुलित भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ता है।
स्पष्ट है कि भारत ने यह संदेश दिया है — मित्रता अपनी जगह है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक प्रतिबद्धताएं भी उतनी ही अहम हैं।


