दुनिया की दिग्गज आईटी कंपनी आईबीएम (IBM) को मंगलवार को ऐसा झटका लगा जिसने निवेशकों के होश उड़ा दिए। अमेरिकी शेयर बाजार में कंपनी का शेयर एक ही दिन में 25 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जो पिछले लगभग चार दशकों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट मानी जा रही है। इस भारी गिरावट के साथ कंपनी के निवेशकों की करीब 69 अरब डॉलर यानी लगभग 6.6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति कुछ ही घंटों में साफ हो गई।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी के भारतीय मूल के सीईओ अरविंद कृष्णा का निवेशकों के नाम लिखा गया पत्र और दूसरी तिमाही को लेकर दिया गया कमजोर कारोबारी अनुमान बताया जा रहा है। जैसे ही यह जानकारी बाजार में पहुंची, निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिकवाली शुरू कर दी और देखते ही देखते IBM का स्टॉक धराशायी हो गया।
मंगलवार को अमेरिकी बाजार खुलते ही आईबीएम के शेयर में तेज गिरावट शुरू हुई। कारोबार के अंत तक कंपनी का शेयर 25.21 प्रतिशत टूटकर 217.07 डॉलर पर बंद हुआ। इस एक दिन की गिरावट ने कंपनी के बाजार पूंजीकरण को भी बुरी तरह प्रभावित किया। आईबीएम का मार्केट कैप लगभग 272.78 अरब डॉलर से घटकर 203.78 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को कंपनी से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी तिमाही के लिए दिए गए कमजोर संकेतों ने बाजार का भरोसा तोड़ दिया। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए तेजी से शेयर बेचना शुरू कर दिया।
यह गिरावट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आईबीएम के इतिहास में इतनी बड़ी गिरावट बहुत कम देखने को मिली है। इससे पहले 1987 के ब्लैक मंडे के दौरान कंपनी का शेयर एक दिन में लगभग 23 प्रतिशत गिरा था। इस बार की गिरावट उससे भी ज्यादा दर्ज की गई, जिससे यह कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावटों में शामिल हो गई।
आईबीएम में आई इस भारी कमजोरी का असर केवल इसी कंपनी तक सीमित नहीं रहा। अमेरिकी टेक सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ गए। माइक्रोसॉफ्ट, सर्विसनाउ, सेल्सफोर्स और इंटुइट जैसी कंपनियों के शेयरों में भी 2 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों की चिंता पूरे टेक सेक्टर तक फैल गई।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी बड़ी टेक कंपनी के भविष्य को लेकर नकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो उसका असर पूरे सेक्टर पर पड़ता है। खासतौर पर तब, जब कंपनी का वैश्विक आईटी उद्योग में बड़ा योगदान हो।
हालांकि, कई विश्लेषकों का यह भी मानना है कि शेयर बाजार में इस तरह की तेज गिरावट हमेशा कंपनी की लंबी अवधि की स्थिति को नहीं दर्शाती। आने वाले महीनों में कंपनी का वास्तविक प्रदर्शन, नए ऑर्डर, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कारोबार की प्रगति और अगली तिमाही के नतीजे यह तय करेंगे कि आईबीएम इस झटके से कितनी जल्दी उबर पाती है।
फिलहाल इतना तय है कि आईबीएम के शेयर में आई यह ऐतिहासिक गिरावट वैश्विक शेयर बाजार की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गई है। अब निवेशकों की निगाह कंपनी की अगली रणनीति और प्रबंधन की भविष्य की योजनाओं पर टिकी हुई है।


