बॉलीवुड अभिनेत्री खुशी कपूर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित पक्षों को खुशी कपूर से जुड़े आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी सेलिब्रिटी की पहचान और छवि के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
खुशी कपूर ने अपनी पहचान, तस्वीर, नाम और पर्सनैलिटी राइट्स के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उनकी अंतरिम सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। मामले में कोर्ट ने ऐसे अज्ञात लोगों के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में कदम उठाया है, जो उनकी पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस तरह के आदेश को आम तौर पर ‘जॉन डो’ आदेश के तौर पर जाना जाता है। इसका उद्देश्य उन अज्ञात व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ भी कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराना होता है, जिनकी पहचान उस समय स्पष्ट नहीं होती, लेकिन उनके द्वारा किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन किए जाने की आशंका होती है।
बुधवार को जस्टिस ज्योति सिंह ने खुशी कपूर की याचिका पर सुनवाई की। अदालत के सामने मुख्य मुद्दा उनकी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा से जुड़ा था। याचिका में कथित तौर पर बिना अनुमति उनकी पहचान और छवि का इस्तेमाल करके कंटेंट तैयार करने और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट भी है। अदालत के निर्देश के बाद संबंधित प्लेटफॉर्म्स को खुशी कपूर से संबंधित ऐसे कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया अपनानी होगी, जिसे उनके अधिकारों का उल्लंघन माना गया है।
आज के दौर में किसी सेलिब्रिटी की तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल केवल सामान्य सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है। AI की मदद से किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या चेहरे को बदलकर ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जिसका उस व्यक्ति से वास्तविक रूप से कोई संबंध नहीं होता।
इसी वजह से सेलिब्रिटीज के पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अदालतों में मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मशहूर हस्तियों के नाम, फोटो, आवाज, चेहरा और उनकी पहचान से जुड़े अन्य पहलुओं का इस्तेमाल विज्ञापन, मर्चेंडाइज, डिजिटल कंटेंट और AI-generated सामग्री में किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
इससे पहले जान्हवी कपूर से जुड़े मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित आपत्तिजनक और अनधिकृत कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए थे। अब खुशी कपूर के मामले में भी अदालत का रुख यह संकेत देता है कि किसी सेलिब्रिटी की पहचान का बिना अनुमति व्यावसायिक या आपत्तिजनक इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
पर्सनैलिटी राइट्स का मूल उद्देश्य किसी व्यक्ति की पहचान और सार्वजनिक छवि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर नियंत्रण से जुड़ा है। खास तौर पर मशहूर हस्तियों के मामले में उनके नाम और छवि का इस्तेमाल कई बार व्यावसायिक फायदे के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में अदालत यह देख सकती है कि इस्तेमाल की अनुमति ली गई थी या नहीं और उससे संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा या अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
खुशी कपूर से जुड़े इस मामले ने डिजिटल दुनिया में सेलिब्रिटी अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल फिर सामने ला दिया है। AI के दौर में किसी व्यक्ति की वास्तविक और नकली डिजिटल पहचान के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में अदालतों के सामने भी यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि तकनीक का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और अधिकारों को नुकसान पहुंचाने के लिए न हो।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह केवल एक अभिनेत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की बदलती कानूनी स्थिति को भी सामने लाता है। आने वाले समय में AI से जुड़े ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती है तो अदालतों के सामने इसी तरह के कई नए कानूनी सवाल आ सकते हैं।
फिलहाल खुशी कपूर को अदालत से मिली यह अंतरिम राहत उनके नाम, पहचान और पर्सनैलिटी राइट्स के कथित अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब आगे की सुनवाई में अदालत इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार करेगी और यह तय होगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद संबंधित कंटेंट को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।


