मध्य प्रदेश के इंदौर से लूट की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें आरोपियों की एक छोटी सी गलती ने उन्हें सीधे पुलिस तक पहुंचा दिया। बताया जा रहा है कि दो बदमाशों ने एक फूड डिलीवरी वर्कर से मोबाइल लूटने की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद दोनों आरोपी भागने के बजाय सड़क किनारे एक दुकान पर पहुंचे और वहां तीन प्लेट बिरयानी खाई।
बिरयानी खाने के बाद दोनों ने दुकानदार को कैश देने के बजाय UPI के जरिए पेमेंट कर दिया। यही डिजिटल पेमेंट बाद में पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बन गया। पुलिस ने CCTV फुटेज और साइबर टीम की मदद से इस डिजिटल ट्रांजैक्शन को आरोपियों तक पहुंचने की कड़ी बनाया और आखिरकार दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, इंदौर में एक गिग वर्कर के साथ लूट की घटना सामने आई थी। आरोप है कि दो बदमाशों ने फूड डिलीवरी का काम करने वाले युवक को निशाना बनाया और उसका मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की गतिविधियों के बारे में अहम सुराग मिलने लगे। CCTV फुटेज में वारदात के बाद दोनों संदिग्धों की आवाजाही दिखाई दी। पुलिस ने उनके रास्ते को ट्रेस करने की कोशिश की और इसी दौरान जांच एक बिरयानी की दुकान तक पहुंच गई।
पुलिस को पता चला कि लूट की वारदात के बाद दोनों संदिग्ध एक दुकान पर रुके थे। वहां उन्होंने तीन प्लेट बिरयानी खाई। आमतौर पर अपराध करने के बाद आरोपी पहचान छिपाने या पुलिस से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन दोनों ने बिरयानी का भुगतान डिजिटल तरीके से कर दिया।
दोनों ने UPI के जरिए पेमेंट किया था। पुलिस की साइबर टीम ने इसी डिजिटल ट्रांजैक्शन को जांच का अहम हिस्सा बनाया। पेमेंट से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई और संदिग्धों की पहचान तक पहुंचने की कोशिश शुरू हुई।
CCTV फुटेज और UPI ट्रांजैक्शन से मिले सुरागों को जोड़ते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर दिखाया कि डिजिटल पेमेंट आज किस तरह जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बन सकता है। किसी दुकान पर किया गया छोटा सा UPI ट्रांजैक्शन भी किसी व्यक्ति की गतिविधियों की कड़ी जोड़ने में मदद कर सकता है।
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपियों ने लूट की वारदात के तुरंत बाद ही ऐसी गलती कर दी, जिसने पुलिस की जांच को आसान बना दिया। अगर उन्होंने बिरयानी का भुगतान डिजिटल तरीके से नहीं किया होता, तो पुलिस को उन तक पहुंचने में ज्यादा समय लग सकता था।
हालांकि, किसी भी अपराध की जांच में सिर्फ एक डिजिटल ट्रांजैक्शन के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। पुलिस CCTV फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों को जोड़कर मामले की कड़ियां तैयार करती है। इंदौर के इस मामले में भी पुलिस ने कथित UPI पेमेंट के साथ CCTV और साइबर जांच की मदद ली।
फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। इस घटना की कहानी सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन सकती है, क्योंकि लूट के बाद खाई गई तीन प्लेट बिरयानी और उसका UPI पेमेंट ही आरोपियों के खिलाफ जांच का महत्वपूर्ण सुराग बन गया।


