उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतों और उपलब्धता को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए और कालाबाजारी या तय कीमत से ज्यादा दाम वसूलने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश में चीनी की कोई कमी नहीं है और चीनी मिलों के पास पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है। ऐसे में अगर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने, चीनी को रोककर रखने या ज्यादा कीमत पर बेचने की कोशिश की जाती है, तो उसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार की नजर खास तौर पर उन डीलरों और कारोबारियों पर है, जो बड़ी मात्रा में चीनी का स्टॉक रख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि 400 टन से ज्यादा चीनी का स्टॉक रखने वाले या 30 दिनों से अधिक समय तक चीनी का भंडारण करने वाले डीलरों के खिलाफ एस्मा के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकार के इस फैसले का मकसद बाजार में चीनी की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि चीनी की जमाखोरी के कारण आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। अगर किसी व्यापारी या डीलर द्वारा स्टॉक को जानबूझकर रोककर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश की जाती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि ओवरप्राइसिंग पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। यानी अगर कोई कारोबारी निर्धारित या उचित मूल्य से ज्यादा कीमत पर चीनी बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में कीमतों को लेकर किसी तरह की मनमानी न हो।
प्रदेश में चीनी का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और कई चीनी मिलों में पर्याप्त भंडार मौजूद बताया गया है। ऐसे में सरकार का मानना है कि बाजार में किसी तरह की कृत्रिम कमी की स्थिति नहीं बननी चाहिए। अधिकारियों को स्टॉक की निगरानी करने और जरूरत के मुताबिक बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले के बाद अब चीनी कारोबार से जुड़े डीलरों और बड़े स्टॉक रखने वाले व्यापारियों की गतिविधियों पर प्रशासन की नजर बढ़ सकती है। संबंधित विभागों को यह भी देखना होगा कि किस कारोबारी के पास कितना स्टॉक है और वह कितने समय से रखा हुआ है। अगर तय सीमा से ज्यादा भंडारण पाया जाता है, तो नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब आम उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी आवश्यक वस्तु की जमाखोरी और कालाबाजारी का सीधा असर बाजार की कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार ने अधिकारियों को पहले से सतर्क रहने और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में प्रशासन किस तरह से इस आदेश को जमीन पर लागू करता है। 400 टन से ज्यादा स्टॉक रखने वाले और 30 दिनों से अधिक भंडारण करने वाले डीलरों की जांच तेज हो सकती है। साथ ही बाजार में चीनी की कीमत और उपलब्धता पर भी निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार चीनी की कालाबाजारी, जमाखोरी और ओवरप्राइसिंग को लेकर सख्त कार्रवाई के मूड में है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए किसी भी स्तर पर कृत्रिम कमी पैदा करने या उपभोक्ताओं से मनमानी कीमत वसूलने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।


