मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश ने बिजली की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए पावर बैंकिंग को लेकर बड़ा समझौता किया है। दोनों राज्यों के पावर कॉरपोरेशन के बीच शुक्रवार को लखनऊ में हुए इस करार के तहत मौसम के हिसाब से बिजली की मांग में आने वाले अंतर का फायदा उठाते हुए दोनों राज्य एक-दूसरे के साथ बिजली संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे।
यह समझौता मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड यानी MPPMCL और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी UPPCL के बीच हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली की खरीद, आपूर्ति और मध्यम अवधि में पावर बैंकिंग की व्यवस्था को मजबूत करना है।
दरअसल, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग का पैटर्न अलग-अलग है। मध्यप्रदेश में अक्टूबर से मार्च के बीच रबी सीजन के दौरान बिजली की मांग काफी बढ़ जाती है। खासतौर पर कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए बिजली की खपत बढ़ने से इस अवधि में बिजली की जरूरत ज्यादा रहती है।
वहीं उत्तर प्रदेश में अप्रैल से सितंबर के बीच गर्मी और खरीफ सीजन के दौरान बिजली की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में दोनों राज्यों की बिजली की जरूरत अलग-अलग समय पर चरम पर पहुंचती है। इसी अंतर को देखते हुए दोनों राज्य बिजली संसाधनों का साझा उपयोग करने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं।
समझौते के तहत दोनों राज्यों ने प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए 2,000 मेगावाट की एकीकृत सौर ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की क्षमता खरीदने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ बैटरी स्टोरेज को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
इस पूरी पहल में करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। अगर योजना निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती है तो इससे न सिर्फ बिजली उत्पादन और भंडारण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश भी आ सकता है।
इस समझौते का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि दोनों राज्यों को अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। जिस समय किसी राज्य में बिजली की मांग ज्यादा होगी, उस समय उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पावर बैंकिंग व्यवस्था का उद्देश्य भी यही है कि बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाया जा सके। इससे महंगी अल्पकालिक बिजली खरीद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही दोनों राज्यों को लंबे समय के लिए बिजली संसाधनों की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिलेगा।
अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल से बिजली संसाधनों के कुशल साझा उपयोग के साथ-साथ मौजूदा परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल भी संभव होगा। इसके अलावा ग्रिड में लचीलापन बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में भी यह व्यवस्था मददगार हो सकती है।
इस समझौते से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी है। सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए नई बुनियादी संरचना विकसित करनी होगी। इससे निर्माण, संचालन और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
लखनऊ में हुए समझौते के दौरान मध्यप्रदेश के ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन आशीष कुमार गोयल मौजूद रहे। समझौते पर MPPMCL के मुख्य महाप्रबंधक गैर-पारंपरिक ऊर्जा जी. एस. खानूजा और UPPCL के निदेशक योजना दीपक रायजादा ने हस्ताक्षर किए।
दोनों राज्यों ने मध्यम अवधि की सुनिश्चित बिजली बैंकिंग व्यवस्था तलाशने पर भी सहमति जताई है। इसका उद्देश्य मौसम के हिसाब से बदलने वाली बिजली की मांग को देखते हुए बिजली संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना है।
सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज को इस योजना में शामिल करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है। सौर ऊर्जा दिन के समय बड़ी मात्रा में उपलब्ध होती है, जबकि बैटरी स्टोरेज के जरिए जरूरत के समय इस ऊर्जा का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ यह समझौता दोनों राज्यों के बिजली क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 2,000 मेगावाट सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज की प्रस्तावित खरीद से जहां ऊर्जा क्षमता बढ़ सकती है, वहीं करीब 10,000 करोड़ रुपये के संभावित निवेश से नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।


