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PM Modi के UAE दौरे से पहले भारत ने भेजे घातक हथियार! C-17 की गुप्त लैंडिंग से मचा हड़कंप

पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर के बीच भारत और यूएई की दोस्ती अब नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे से ठीक पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई एक खास गतिविधि ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। बीती रात इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यूएई एयरफोर्स का विशाल बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर-3 विमान उतरा, जिसे लेकर कई रणनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, यह कोई सामान्य सैन्य उड़ान नहीं थी। माना जा रहा है कि यूएई अपने रक्षा भंडार को मजबूत करने के लिए भारत से अहम डिफेंस सप्लाई लेने पहुंचा था। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन रक्षा गलियारों में चर्चा है कि भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित हथियार एवं रक्षा उपकरण यूएई को भेजे गए हैं।

हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ा है। ईरान और यूएई के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित किया है। फुजेरा पेट्रोलियम जोन पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद यूएई ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। ऐसे माहौल में भारत का आगे आना दोनों देशों की गहरी रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

भारत और यूएई दोनों ही C-17 ग्लोबमास्टर विमान का संचालन करते हैं। भारत के पास 11 जबकि यूएई के पास 18 C-17 विमान हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक और तकनीकी सहयोग बेहद आसान हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इंटर-ऑपरेबिलिटी भविष्य में दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में हुए लेटर ऑफ इंटेंट को अब एक बड़े रक्षा समझौते में बदला जा सकता है। इस संभावित डिफेंस पार्टनरशिप में मिसाइल और ड्रोन का संयुक्त उत्पादन, साइबर सुरक्षा, स्पेशल फोर्स ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे बड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की सक्रिय भूमिका भी मानी जा रही है। हाल ही में उनकी यूएई और सऊदी अरब की गोपनीय यात्राओं ने यह संकेत दे दिया था कि भारत पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है।

भारत और यूएई के बीच व्यापार पहले ही 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। करीब 35 लाख भारतीय यूएई में काम कर रहे हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा हिस्सा भी यूएई पर निर्भर करता है। लेकिन अब दोनों देशों का रिश्ता केवल तेल और व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रक्षा और रणनीतिक सुरक्षा तक पहुंच चुका है।

सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि क्या भारत भविष्य में यूएई को अपने सबसे घातक हथियार जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका रॉकेट सिस्टम भी दे सकता है? अगर ऐसा होता है तो यह केवल भारत-यूएई संबंधों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की रणनीतिक राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश होगा।

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