भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। वैश्विक कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म Kpler की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का आयात अनुकूल परिस्थितियों में करीब 30 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह भारत के ऊर्जा आयात के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। हालांकि, यह अनुमान बाजार की परिस्थितियों, वैश्विक आपूर्ति और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगा।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। रेड सी (लाल सागर) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए रूस एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बना रह सकता है।
Kpler की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाई है। रूस के अलावा भारत सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, अफ्रीका, वेनेजुएला और अटलांटिक बेसिन के अन्य देशों से भी तेल आयात करता है। इसके बावजूद रूस प्रतिस्पर्धी कीमतों और पर्याप्त आपूर्ति क्षमता के कारण भारत के लिए एक प्रमुख ऊर्जा साझेदार बना हुआ है।
रिपोर्ट में Kpler के विश्लेषकों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि बाजार की परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो रूस से भारत को होने वाली तेल आपूर्ति 30 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से भी ऊपर जा सकती है। हालांकि, यह भी बताया गया है कि रूस के ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन संघर्ष के प्रभाव और निर्यात से जुड़ी चुनौतियां आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में वास्तविक आयात कई अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी खरीद रणनीति को अधिक लचीला बनाया है। इससे उन्हें विभिन्न देशों से कच्चा तेल खरीदने और आपूर्ति में आने वाले अल्पकालिक व्यवधानों का बेहतर तरीके से सामना करने में मदद मिलती है। यही रणनीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों के अनुसार, रूस के कुछ प्रमुख निर्यात टर्मिनल न केवल रूसी तेल बल्कि कजाकिस्तान के तेल के निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि ब्लैक सी या अन्य प्रमुख समुद्री मार्गों में किसी तरह की बड़ी बाधा आती है, तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे परिदृश्य में भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई स्रोतों पर निर्भर रहने की नीति अपनाए हुए है।
इस बीच अमेरिका में संभावित टैरिफ और व्यापारिक नीतियों को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस विषय पर अपनी आधिकारिक ऊर्जा खरीद नीति में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि ऊर्जा आयात से जुड़े निर्णय राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
फिलहाल रूस से 30 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात का आंकड़ा एक संभावित अनुमान है, जिसकी पुष्टि भविष्य की बाजार स्थितियों और वास्तविक आयात के आंकड़ों से होगी। फिर भी यह स्पष्ट है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रहा है और वैश्विक परिस्थितियों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।


