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अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव का असर! रुपया रिकॉर्ड 28 पैसे टूटा, सेंसेक्स 700 अंक लुढ़का

वैश्विक आर्थिक चिंताओं के बीच भारतीय वित्तीय बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के नए टैरिफ प्रस्ताव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते रुपया और शेयर बाजार दोनों दबाव में आ गए।

कारोबार की शुरुआत में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे टूटकर 95.64 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं घरेलू शेयर बाजार में भी भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स करीब 700 अंक तक फिसल गया।

क्यों टूटा रुपया?

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्वारा भारत सहित 53 देशों पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने के प्रस्ताव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

यह प्रस्ताव कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labor) से जुड़े आयात नियमों के उल्लंघन से संबंधित है। निवेशकों को आशंका है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत के निर्यात और व्यापार पर असर पड़ सकता है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा डॉलर-रुपया विनिमय दर

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.43 प्रति डॉलर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 95.64 के स्तर तक गिर गया।

एक दिन पहले यानी मंगलवार को रुपया 95.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस तरह एक ही दिन में 28 पैसे की कमजोरी दर्ज की गई।

इस दौरान डॉलर इंडेक्स भी मजबूत बना रहा और छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला सूचकांक बढ़कर 99.24 पर पहुंच गया।

शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

सेंसेक्स 699.74 अंक टूटकर 73,959.48 पर पहुंच गया।

निफ्टी 177.40 अंक गिरकर 23,302.50 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक व्यापार तनाव के कारण बाजार में दबाव बढ़ा है।

विदेशी निवेशकों ने बेचे हजारों करोड़ के शेयर

शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) मंगलवार को शुद्ध बिकवाल रहे।

एफआईआई ने एक ही कारोबारी सत्र में लगभग 8,362.92 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली की। इससे बाजार में कमजोरी और बढ़ गई।

कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड लगभग 0.82 प्रतिशत बढ़कर 96.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी व्यापार नीति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

फिलहाल अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव ने बाजार की धारणा को झटका दिया है और इसका असर रुपये से लेकर शेयर बाजार तक साफ दिखाई दे रहा है।

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