आज के समय में घर का Wi-Fi सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाई, ऑफिस मीटिंग, वीडियो कॉल, स्ट्रीमिंग और कई जरूरी कामों के लिए तेज और स्थिर इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। लेकिन अक्सर घर के एक कमरे में Wi-Fi अच्छा चलता है, जबकि दूसरे कमरे या बालकनी में पहुंचते ही सिग्नल कमजोर हो जाता है।
ऐसी स्थिति में कई लोग तुरंत नया और महंगा राउटर खरीदने के बारे में सोचने लगते हैं। हालांकि, कुछ आसान उपायों से मौजूदा Wi-Fi नेटवर्क की कवरेज को बेहतर करने की कोशिश की जा सकती है। इनमें राउटर की सही जगह चुनने से लेकर एक साधारण मेटल रिफ्लेक्टर का इस्तेमाल तक शामिल है।
Aluminum Foil कैसे कर सकती है मदद?
एल्युमिनियम फॉयल की धातु वाली सतह रेडियो तरंगों को रिफ्लेक्ट कर सकती है। इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करके फॉयल को एक घुमावदार आकार में राउटर के एंटीना के पीछे लगाया जा सकता है।
इसका उद्देश्य Wi-Fi सिग्नल को हर दिशा में फैलाने के बजाय एक खास दिशा की तरफ ज्यादा केंद्रित करना होता है। अगर घर में कोई ऐसा कमरा है जहां सिग्नल लगातार कमजोर रहता है, तो रिफ्लेक्टर उस दिशा में सिग्नल को बेहतर तरीके से पहुंचाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, इससे पूरे घर की स्पीड अचानक कई गुना बढ़ने की गारंटी नहीं है। इसका असर राउटर, एंटीना, दीवारों और घर की बनावट के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
Parabolic Reflector का इस्तेमाल
अगर आपके राउटर में बाहरी एंटीना है तो एल्युमिनियम फॉयल को हल्के घुमावदार या पैराबोलिक आकार में तैयार करके एंटीना के पीछे लगाया जा सकता है।
इस तरह का रिफ्लेक्टर सिग्नल को एक निश्चित दिशा में भेजने में मदद कर सकता है। यानी अगर राउटर के एक तरफ वाला कमरा कमजोर नेटवर्क वाला है, तो रिफ्लेक्टर को उसी दिशा में सेट किया जा सकता है।
डार्टमाउथ कॉलेज के WiPrint अध्ययन में भी 3D प्रिंटेड पैराबोलिक रिफ्लेक्टर के जरिए वायरलेस सिग्नल को दिशा देने की तकनीक का परीक्षण किया गया था। लेकिन घर में इस्तेमाल होने वाली साधारण फॉयल ट्रिक के परिणाम उस शोध के परिणामों के बराबर मानना सही नहीं होगा।
Cardboard और Foil से बना सकते हैं Reflector
घर में उपलब्ध कार्डबोर्ड और एल्युमिनियम फॉयल से भी एक साधारण रिफ्लेक्टर बनाया जा सकता है। कार्डबोर्ड को आधार बनाकर उसके ऊपर फॉयल लगाई जा सकती है और उसे राउटर के एंटीना के पीछे घुमावदार आकार में रखा जा सकता है।
इसका मकसद सिग्नल को मनचाही दिशा में रिफ्लेक्ट करना है। इसे प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और रिफ्लेक्टर की दिशा बदलकर देखा जा सकता है कि किस पोजिशन में नेटवर्क बेहतर मिलता है।
Soft Drink Can का भी हो सकता है इस्तेमाल
एल्युमिनियम फॉयल उपलब्ध नहीं होने पर खाली एल्युमिनियम कैन का इस्तेमाल भी रिफ्लेक्टर के तौर पर किया जा सकता है। कैन को काटकर घुमावदार सतह बनाई जा सकती है और उसे एंटीना के पीछे लगाया जा सकता है।
हालांकि, कैन काटते समय बेहद सावधानी जरूरी है क्योंकि उसके किनारे काफी तेज हो सकते हैं। इसे बच्चों से दूर रखना चाहिए और राउटर या बिजली के कनेक्शन के किसी हिस्से से धातु को संपर्क में नहीं लाना चाहिए।
Router की जगह सबसे ज्यादा मायने रखती है
Wi-Fi बेहतर करने के लिए सिर्फ फॉयल ट्रिक पर निर्भर रहना सही नहीं है। सबसे पहले राउटर की जगह पर ध्यान देना चाहिए।
राउटर को घर के बीच में, खुली और अपेक्षाकृत ऊंची जगह पर रखना बेहतर रहता है। उसे मोटी दीवारों, बड़े धातु के सामान, माइक्रोवेव और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बिल्कुल पास रखने से बचना चाहिए।
अगर राउटर किसी बंद अलमारी या कोने में रखा है तो उसकी जगह बदलने से ही कई बार सिग्नल में सुधार महसूस हो सकता है।
5GHz और 2.4GHz में भी समझें अंतर
अगर आपका राउटर डुअल-बैंड सपोर्ट करता है तो 5GHz बैंड आमतौर पर ज्यादा स्पीड दे सकता है, लेकिन इसकी रेंज 2.4GHz के मुकाबले कम हो सकती है। दूसरी तरफ 2.4GHz बैंड लंबी दूरी और दीवारों के पार बेहतर पहुंच सकता है, हालांकि इसमें भीड़ और इंटरफेरेंस ज्यादा हो सकता है।
इसलिए राउटर से दूर वाले कमरे में 2.4GHz और पास में हाई-स्पीड जरूरत के लिए 5GHz का इस्तेमाल परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है।
सुरक्षा का भी रखें ध्यान
Wi-Fi सिग्नल को किसी दिशा में केंद्रित करने से नेटवर्क की सुरक्षा अपने आप मजबूत नहीं हो जाती। Wi-Fi को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और जहां संभव हो WPA2 या WPA3 सिक्योरिटी का इस्तेमाल करें।
राउटर का फर्मवेयर भी समय-समय पर अपडेट करते रहें। किसी भी अनजान डिवाइस को नेटवर्क से जुड़ा हुआ पाए जाने पर राउटर की सेटिंग्स की जांच करना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, एल्युमिनियम फॉयल रिफ्लेक्टर एक कम लागत वाला प्रयोग है, जिससे किसी खास दिशा में Wi-Fi कवरेज बेहतर करने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन सबसे पहले राउटर की सही पोजिशन, सही Wi-Fi बैंड और नेटवर्क सेटिंग्स पर ध्यान देना ज्यादा प्रभावी तरीका है।


