अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। अमेरिकी विशेष अभियान बल फिलीपीन और क्षेत्र के अन्य सहयोगी देशों की सेनाओं के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसका उद्देश्य सहयोगी देशों की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना, सुरक्षा सहयोग का विस्तार करना और क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका को कम करना बताया जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपीन के बीच तनाव लगातार चर्चा में है।
अमेरिकी विशेष अभियान कमान के कमांडर एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली इस समय एशिया के दौरे पर हैं। दक्षिण कोरिया की यात्रा के बाद वह फिलीपीन पहुंचे, जहां उन्होंने वहां के सैन्य और सरकारी अधिकारियों के साथ सुरक्षा सहयोग को लेकर बातचीत की। इसके बाद उनके जापान जाने की योजना है। एशिया में अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देशों की यात्रा के दौरान ब्रैडली क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
अमेरिकी विशेष अभियान कमान अमेरिका की सैन्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अंतर्गत बड़ी संख्या में सैन्यकर्मी काम करते हैं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विशेष अभियानों से जुड़े कार्य किए जाते हैं। एडमिरल ब्रैडली के मुताबिक, उनकी कमान के अधिकांश बल दुनिया भर के 80 से ज्यादा देशों में तैनात हैं। ऐसे में एशिया में सहयोगी देशों के साथ सैन्य अभ्यास बढ़ाने की योजना को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलीपीन के अधिकारियों के साथ बातचीत में सेना के आधुनिकीकरण और संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अमेरिका और फिलीपीन पहले से ही रक्षा क्षेत्र में सहयोग करते हैं और दोनों देशों की सेनाएं समय-समय पर संयुक्त अभ्यास करती रही हैं। अब विशेष अभियान बलों के स्तर पर भी सहयोग बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और प्रशिक्षण को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
दक्षिण चीन सागर इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम हिस्सा है। इस समुद्री क्षेत्र में चीन के अलावा फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान सहित कई पक्ष अपने-अपने दावे करते हैं। लंबे समय से यहां समुद्री सीमा और द्वीपों को लेकर विवाद चला आ रहा है। हाल के वर्षों में चीन और फिलीपीन के बीच समुद्री क्षेत्र में टकराव और आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़े हैं।
अमेरिका ने लंबे समय से फिलीपीन को अपने महत्वपूर्ण एशियाई सहयोगियों में शामिल किया है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर कई समझौते और सैन्य गतिविधियां पहले से मौजूद हैं। अमेरिका की ओर से यह भी स्पष्ट किया जाता रहा है कि फिलीपीन पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसकी रक्षा प्रतिबद्धताएं लागू हो सकती हैं। ऐसे में संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बढ़ोतरी को क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, सैन्य अभ्यास बढ़ने के साथ क्षेत्रीय तनाव को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं। दक्षिण चीन सागर में पहले से ही कई देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा मौजूद है। ऐसे में अमेरिका और फिलीपीन की सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी को चीन किस नजर से देखता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, अमेरिका का कहना है कि सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा साझेदारी और सैन्य तैयारी का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और संभावित टकराव को रोकना है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एशिया में सहयोगी देशों के साथ सैन्य संबंध मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। संयुक्त अभ्यासों के जरिए सैनिकों को अलग-अलग परिस्थितियों में एक साथ काम करने का प्रशिक्षण मिलता है और आपसी समन्वय बेहतर होता है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा, समुद्री सुरक्षा और अन्य आपात स्थितियों में भी ऐसी साझेदारी उपयोगी साबित हो सकती है।
फिलहाल एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली का एशिया दौरा और फिलीपीन के साथ सैन्य अभ्यास बढ़ाने की चर्चा क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की सक्रियता से आने वाले समय में क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य सहयोग को किस स्तर तक बढ़ाते हैं और चीन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।


