दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में और बड़ा होने जा रहा है। एयरपोर्ट का संचालन करने वाली दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड यानी DIAL ने अगले 10 वर्षों के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत एयरपोर्ट की सालाना यात्री संभालने की क्षमता को मौजूदा 10.6 करोड़ से बढ़ाकर 12.5 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो दिल्ली एयरपोर्ट भविष्य में हर साल करीब 12.5 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा।
प्रस्तावित मास्टर प्लान को 2036 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। योजना के तहत एयरपोर्ट की मौजूदा सुविधाओं का विस्तार करने के साथ-साथ यात्री क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। इसके लिए संबंधित हितधारकों के साथ चर्चा के बाद मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस विस्तार योजना का पहला बड़ा हिस्सा टर्मिनल-3 यानी T3 से जुड़ा हुआ है। DIAL की योजना अप्रैल 2030 तक T3 में एक नया पियर-ई बनाने की है। इस नए पियर की यात्री संभालने की क्षमता करीब एक करोड़ यात्रियों की होगी। इससे एयरपोर्ट की कुल क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और बढ़ते हवाई यातायात को संभालने में मदद मिलेगी।
मौजूदा समय में दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे बड़े और व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल है। यहां फिलहाल तीन टर्मिनल हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन मुख्य रूप से टर्मिनल-3 से किया जाता है। यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ एयरपोर्ट पर सुविधाओं के विस्तार की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
मास्टर प्लान के अनुसार क्षमता बढ़ाने का काम एक साथ पूरा नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में अप्रैल 2030 तक एयरपोर्ट की सालाना यात्री संभालने की क्षमता को बढ़ाकर 11.6 करोड़ करने का प्रस्ताव है। इसके बाद 2032 तक इसे बढ़ाकर 12.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
यात्री क्षमता बढ़ाने की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि भारत में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात के विस्तार के साथ बड़े एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी केंद्र भी है, इसलिए यहां एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाना विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, प्रस्तावित मास्टर प्लान में अभी कुछ योजनाओं पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इनमें चौथे टर्मिनल का निर्माण और ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर यानी APM सिस्टम की स्थापना शामिल है। इन दोनों परियोजनाओं को लेकर फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आने वाले समय में यात्री संख्या, संचालन की जरूरत और अन्य तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन पर फैसला किया जा सकता है।
ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर सिस्टम एयरपोर्ट के अलग-अलग हिस्सों और टर्मिनल के बीच यात्रियों को तेजी से पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बड़े और व्यस्त एयरपोर्ट्स पर ऐसी व्यवस्था यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि दिल्ली एयरपोर्ट पर इसे लागू करने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
DIAL की ओर से तैयार किया जा रहा यह मास्टर प्लान आने वाले एक दशक में दिल्ली एयरपोर्ट के विस्तार की दिशा तय करेगा। योजना के तहत यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और नई सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
अगर प्रस्तावित योजना समय पर लागू होती है तो 2030 तक दिल्ली एयरपोर्ट की क्षमता 11.6 करोड़ और 2032 तक 12.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच सकती है। इसके बाद 2036 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे की सुविधाओं और विस्तार पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल मास्टर प्लान को हितधारकों के साथ चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।


