वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विदेशी पूंजी की निकासी और कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 307 अंक से ज्यादा गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 24,080 के स्तर पर आ गया।
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 307.24 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,957.27 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 513.19 अंक तक फिसल गया था। हालांकि बाद में बाजार में कुछ सुधार आया, लेकिन सेंसेक्स नुकसान से पूरी तरह उबर नहीं पाया।
एनएसई निफ्टी भी सोमवार को दबाव में रहा। निफ्टी 95.25 अंक यानी 0.39 प्रतिशत टूटकर 24,080.40 अंक पर बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 शेयर नुकसान में बंद हुए, जबकि 10 शेयरों में तेजी रही। आईटी और दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव निवेशकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक स्तर पर कारोबार, ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी घरेलू बाजार की चिंता बढ़ाई। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश के आयात बिल और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए दबाव का कारण बनी रही। विदेशी पूंजी की निकासी से बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई देता है।
आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी का भी बाजार पर असर पड़ा। इसके अलावा रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान बनाने वाली कंपनियों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली और बिकवाली का रुख अपनाया।
सोमवार के कारोबार में बाजार की शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स दिन के दौरान अपने ऊपरी स्तर से काफी नीचे आया और एक समय 500 से ज्यादा अंक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अंतिम कारोबारी घंटों में कुछ खरीदारी लौटने से नुकसान सीमित हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया की स्थिति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।
निवेशकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि वैश्विक तनाव किस दिशा में बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में आगे क्या रुख रहता है। अगर तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो भारतीय बाजार पर दबाव जारी रह सकता है।
फिलहाल सोमवार के कारोबार ने एक बार फिर दिखा दिया कि घरेलू शेयर बाजार पर वैश्विक घटनाक्रम का सीधा असर पड़ रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट के साथ बाजार बंद हुआ और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।


