घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला और अंत में सेंसेक्स तथा निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इसके अलावा अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बनी चिंताओं का असर भी बाजार की धारणा पर दिखाई दिया।
मंगलवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 12.99 अंक यानी करीब 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,944.28 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 24.60 अंक टूटकर 24,055.80 अंक पर आ गया। यानी दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट बहुत सीमित रही, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार पूरे कारोबारी सत्र के दौरान दबाव में नजर आया।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स में एक समय काफी ज्यादा गिरावट देखने को मिली थी। एक समय यह 301.15 अंक तक फिसलकर 76,656.12 अंक के स्तर पर पहुंच गया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिन के दौरान बाजार में निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई थी। हालांकि, कारोबार खत्म होते-होते बाजार ने अपनी ज्यादातर गिरावट की भरपाई कर ली और सेंसेक्स मामूली नुकसान के साथ बंद हुआ।
दोपहर करीब 3 बजकर 12 मिनट पर भी सेंसेक्स 271.79 अंक की गिरावट के साथ 76,685.48 अंक पर कारोबार कर रहा था। इसके बाद समापन नीलामी सत्र यानी क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान सूचकांक ने अपनी अधिकांश गिरावट की भरपाई कर ली। आखिरकार दिन का कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 76,944.28 अंक पर बंद हुआ।
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को लेकर रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय होती है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर भी दबाव डाल सकता है। इसके अलावा महंगे तेल का असर महंगाई और रुपये की स्थिति पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की तेजी को शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जाता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरों के बीच बाजार में जोखिम को लेकर सतर्कता देखने को मिली। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है और निवेशक अक्सर जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश को लेकर सावधानी बरतते हैं। भारतीय बाजार भी इस वैश्विक माहौल से अछूता नहीं रहा।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। विश्लेषकों के मुताबिक, अगर अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो उभरते बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसका असर विदेशी निवेश और शेयर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है।
मंगलवार के कारोबार में कुछ प्रमुख शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। मारुति और भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई के शेयरों में कमजोरी रही। इन शेयरों में हुई बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाने में योगदान दिया। हालांकि, दूसरी तरफ आईटीसी और इंफोसिस जैसे शेयरों ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक थामने का काम किया।
निफ्टी की बात करें तो यह भी पूरे कारोबारी सत्र के दौरान दबाव में रहा। हालांकि सेंसेक्स की तरह निफ्टी ने भी दिन के निचले स्तरों से कुछ सुधार किया। अंत में निफ्टी 24.60 अंक यानी करीब 0.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,055.80 अंक पर बंद हुआ। इस तरह निफ्टी ने 24 हजार के स्तर के ऊपर अपनी स्थिति बनाए रखी।
कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। कच्चे तेल की तेजी, पश्चिम एशिया का तनाव और अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की चाल को प्रभावित किया। हालांकि घरेलू बाजार ने दिन के दौरान हुई बड़ी गिरावट से काफी हद तक वापसी की और अंत में सेंसेक्स केवल 13 अंक तथा निफ्टी करीब 25 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ।
अब आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा पर रहेगी। अगर वैश्विक दबाव कम होता है तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में अस्थिरता आगे भी बनी रह सकती है। फिलहाल मंगलवार के कारोबार का संदेश यही रहा कि बाजार पर दबाव जरूर था, लेकिन आखिरी समय में खरीदारी और रिकवरी ने बड़ी गिरावट को सीमित कर दिया।


