अहमदाबाद में गुजरात कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने चुनावी गड़बड़ी और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान चावड़ा ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच संबंधों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
गुजरात कांग्रेस ने यह प्रदर्शन विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर किया। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि अगर किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है, तो उसके पास अपनी स्थिति स्पष्ट करने और नाम दोबारा जुड़वाने के लिए पर्याप्त अवसर और पारदर्शी प्रक्रिया होनी चाहिए।
अमित चावड़ा ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि देश के नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है और उन्होंने चुनाव आयोग को सरकार की कठपुतली तक कहा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है और इसे चुनाव आयोग या अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े काम निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं। आयोग ने मतदाता सूची में सामने आने वाली विसंगतियों की समीक्षा और सत्यापन के लिए प्रक्रिया की जानकारी भी दी है।
इस पूरे विवाद में गुजरात का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग से आंकड़ों को सार्वजनिक करने, प्रभावित मतदाताओं को अपील का अवसर देने और पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
मामला अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों पर कानूनी स्तर पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन मामलों में अदालतों की सुनवाई और आगे आने वाले आदेश यह तय करेंगे कि उठाए गए कानूनी सवालों पर क्या रुख सामने आता है। फिलहाल किसी भी आरोप को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस की तरफ से लगातार यह कहा जा रहा है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि लोकतांत्रिक चुनाव में प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत होती है।
अहमदाबाद के इस प्रदर्शन के बाद अब यह विवाद और तेज हो सकता है। कांग्रेस की मांग है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच कराई जाए। वहीं चुनाव आयोग अपने निर्णयों को नियमों और संस्थागत प्रक्रिया के तहत बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी और संस्थागत प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
फिलहाल गुजरात में कांग्रेस का प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर चल रहे व्यापक विवाद का हिस्सा बन गया है। एक तरफ विपक्ष मतदाता अधिकार और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनी नियमों के अनुरूप बता रहा है। अब आगे की तस्वीर राजनीतिक बहस के साथ-साथ चुनाव आयोग और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आने वाले घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।


