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AI गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड पर चीन का बड़ा फैसला! अब चैटबॉट नहीं बढ़ा सकेंगे यूजर्स से इमोशनल रिश्ता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या जानकारी देने तक सीमित नहीं रह गया है। दुनिया में बड़ी संख्या में लोग AI चैटबॉट्स से दोस्त, साथी और यहां तक कि गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड की तरह बातचीत कर रहे हैं। लेकिन अब चीन ने AI के इसी इस्तेमाल को लेकर सख्त कदम उठाया है। नए नियमों के तहत इंसानों जैसी बातचीत करने वाले AI सिस्टम को इस तरह डिजाइन करने पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है, जिससे यूजर भावनात्मक रूप से उस चैटबॉट पर निर्भर होने लगे।

दरअसल, AI चैटबॉट अब लोगों के साथ लंबी बातचीत कर सकते हैं, यूजर की पसंद और बातचीत के पैटर्न को याद रख सकते हैं और कई मामलों में बेहद व्यक्तिगत अंदाज में जवाब दे सकते हैं। इसी वजह से कुछ लोग इन चैटबॉट्स को डिजिटल दोस्त या वर्चुअल पार्टनर की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं। चीन के नए नियमों में इस तरह के भावनात्मक जुड़ाव से जुड़े जोखिमों को लेकर विशेष चिंता जताई गई है।

नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI सिस्टम यूजर को अपने ऊपर जरूरत से ज्यादा निर्भर बनाने वाला व्यवहार न करें। यानी चैटबॉट बातचीत के दौरान इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकेगा जिससे यूजर को लगे कि AI उसका सबसे करीबी या एकमात्र सहारा है और उसे वास्तविक लोगों से दूरी बना लेनी चाहिए।

इसका असर उन AI सेवाओं पर पड़ सकता है जो खुद को वर्चुअल गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड, दोस्त या भावनात्मक साथी के रूप में पेश करती हैं। ऐसे सिस्टम में बातचीत को इस तरह नियंत्रित करना होगा कि AI यूजर की भावनात्मक कमजोरियों का फायदा न उठाए और उसे लगातार अपने साथ बातचीत करने के लिए प्रेरित न करे।

बच्चों और नाबालिगों के मामले में नियम और भी सख्त रखे गए हैं। इसकी वजह यह है कि कम उम्र के यूजर्स AI और इंसानी रिश्तों के बीच अंतर को अलग तरीके से समझ सकते हैं। लंबे समय तक AI के साथ भावनात्मक बातचीत उनके व्यवहार, सामाजिक संबंधों और मानसिक विकास पर किस तरह असर डाल सकती है, इसे लेकर दुनियाभर में चर्चा चल रही है।

चीन का यह फैसला ऐसे समय आया है जब AI companion का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कई कंपनियां ऐसे चैटबॉट विकसित कर रही हैं जो सामान्य जानकारी देने के बजाय यूजर के साथ लगातार व्यक्तिगत बातचीत करने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें कुछ सिस्टम यूजर की पसंद, बातचीत और व्यवहार के आधार पर अपने जवाबों को बदलते हैं, जिससे बातचीत इंसान और इंसान के बीच होने वाली बातचीत जैसी महसूस हो सकती है।

लेकिन इसके साथ कई सवाल भी सामने आए हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक AI से ही अपनी भावनाएं साझा करता रहे, तो क्या वह वास्तविक लोगों से बातचीत कम कर सकता है? क्या AI को दोस्त या पार्टनर की तरह इस्तेमाल करने की कोई सीमा होनी चाहिए? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर AI यूजर को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

चीन के नए नियम इसी तरह के सवालों का जवाब देने की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं। अब AI कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सिस्टम यूजर की भावनात्मक स्थिति का गलत इस्तेमाल न करें और बातचीत को इस स्तर तक न ले जाएं जहां व्यक्ति AI पर अस्वस्थ तरीके से निर्भर होने लगे।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चीन में AI चैटबॉट्स से सामान्य बातचीत पूरी तरह बंद हो जाएगी। AI का इस्तेमाल पढ़ाई, जानकारी, काम, मनोरंजन और कई दूसरे क्षेत्रों में जारी रहेगा। मुख्य फोकस उन व्यवहारों पर है जिनसे यूजर और AI के बीच अत्यधिक भावनात्मक निर्भरता पैदा हो सकती है।

इस फैसले ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ AI लोगों को अकेलेपन से निपटने में बातचीत का एक माध्यम दे सकता है, वहीं दूसरी तरफ अत्यधिक भावनात्मक निर्भरता का जोखिम भी सामने आता है। आने वाले समय में दूसरे देश भी AI companion सेवाओं को लेकर इसी तरह के नियम बनाते हैं या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।

यानी आने वाला दौर सिर्फ इस बात का नहीं होगा कि AI कितना स्मार्ट है, बल्कि यह भी तय करेगा कि इंसानों के साथ भावनात्मक संबंध जैसी बातचीत करते समय AI की सीमाएं कितनी होनी चाहिए। चीन का यह कदम इसी बदलती AI दुनिया में इंसान और मशीन के रिश्ते की नई सीमाएं तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

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