उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं, लेकिन अगर लगातार जोड़ों में दर्द, अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी महसूस हो रही है तो इसे केवल उम्र का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण गठिया यानी आर्थराइटिस से जुड़े हो सकते हैं। खासकर ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के बीच मौजूद उपास्थि धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है, जिससे दर्द और गतिविधियों में परेशानी हो सकती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकता है। इसके अलावा अधिक वजन, पहले लगी जोड़ों की चोट और जोड़ों पर लगातार पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी जोखिम बढ़ा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले घुटने, कूल्हे या किसी अन्य जोड़ में गंभीर चोट लगी है, तो भविष्य में उसी जोड़ में ऑस्टियोआर्थराइटिस विकसित होने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए पुरानी चोट को मामूली समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना सही नहीं है।
पारिवारिक इतिहास भी कुछ लोगों में आर्थराइटिस के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। अगर परिवार में किसी करीबी सदस्य को ऑस्टियोआर्थराइटिस रहा है, तो व्यक्ति में इसका खतरा सामान्य से अधिक हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति में बीमारी का कारण और उसका असर अलग हो सकता है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
वजन को नियंत्रित रखना जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। शरीर का अतिरिक्त वजन घुटनों और कूल्हों जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों पर अधिक दबाव डालता है। वजन में लगभग 5 से 10 प्रतिशत की कमी कुछ लोगों में जोड़ों के दर्द और शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी परेशानी को कम करने में मदद कर सकती है। वजन कम करने की योजना व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार चिकित्सक या विशेषज्ञ की सलाह से बनानी चाहिए।
नियमित शारीरिक गतिविधि भी जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। हल्की से मध्यम गतिविधियां, जैसे पैदल चलना, तैराकी, साइकिल चलाना और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत, शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि जिन लोगों को पहले से जोड़ों में दर्द या चोट है, उन्हें व्यायाम का प्रकार और उसकी तीव्रता विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
जोड़ों को चोट से बचाना भी जरूरी है। खेलकूद या शारीरिक मेहनत के दौरान सही तकनीक अपनाने, जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपकरण इस्तेमाल करने और शरीर की क्षमता से अधिक दबाव नहीं डालने से चोट का जोखिम कम किया जा सकता है। पुरानी चोट के बाद यदि दर्द, सूजन या जोड़ को हिलाने में परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
ऑस्टियोआर्थराइटिस के शुरुआती संकेतों में जोड़ों में दर्द, अकड़न, सूजन और गतिविधि करने में परेशानी शामिल हो सकती है। कुछ लोगों को आराम करने के बाद जोड़ में अकड़न महसूस होती है, जबकि लंबे समय तक चलने या काम करने के बाद दर्द बढ़ सकता है। लक्षणों की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है और इनका कारण हमेशा आर्थराइटिस ही हो, यह जरूरी नहीं है।
अगर जोड़ों का दर्द लगातार बना हुआ है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, जोड़ में सूजन दिखाई दे रही है या चलने-फिरने में लगातार परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह मिलने से समस्या के कारण का पता लगाने और उचित प्रबंधन की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
आर्थराइटिस को हर स्थिति में पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित और उचित शारीरिक गतिविधि करना, जोड़ों को चोट से बचाना और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना जोखिम को कम करने और जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद कर सकता है। किसी भी लगातार या गंभीर लक्षण के लिए स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

