क्या आपको Orkut याद है? वो दौर जब सोशल मीडिया पर दोस्तों की प्रोफाइल देखना, स्क्रैपबुक में संदेश छोड़ना और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ना लोगों के लिए किसी खास अनुभव से कम नहीं था। अब करीब 12 साल बाद यह पुराना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक बार फिर चर्चा में है। Orkut के संस्थापक ऑरकुट बुयुक्कोक्टेन ने एक नए सोशल नेटवर्क को विकसित करने के लिए लोगों से समर्थन मांगा है। उनके इस कदम से उन लोगों की पुरानी यादें ताजा हो गई हैं, जिन्होंने इंटरनेट की दुनिया में Orkut के साथ अपना समय बिताया था।
एक समय था जब Orkut भारत में सोशल मीडिया के सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म में शामिल था। उस दौर में आज की तरह हर किसी के हाथ में कई सोशल मीडिया ऐप नहीं होते थे। लोग इंटरनेट कैफे में बैठकर अपनी प्रोफाइल खोलते थे, दोस्तों की तस्वीरें देखते थे और एक-दूसरे के पन्नों पर संदेश छोड़ते थे। Orkut की स्क्रैपबुक इसकी सबसे खास पहचान थी, जहां दोस्त एक-दूसरे के लिए संदेश लिखते थे। जिन लोगों की प्रोफाइल पर ज्यादा स्क्रैप होते थे, उन्हें लोकप्रिय माना जाता था।
Orkut की कम्युनिटी भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थीं। संगीत, फिल्मों, खेल, पढ़ाई और अलग-अलग रुचियों से जुड़े लोग इन समूहों में शामिल होते थे। यहां लोगों को अपनी पसंद के दूसरे लोगों से जुड़ने का अवसर मिलता था। आज सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट और व्यूज की चर्चा होती है, लेकिन Orkut के शुरुआती दौर में दोस्तों के संदेश और आपसी बातचीत का अपना अलग महत्व था।
Orkut को गूगल ने वर्ष 2004 में शुरू किया था। इसका नाम इसके निर्माता ऑरकुट बुयुक्कोक्टेन के नाम पर रखा गया था। उस समय इंटरनेट की दुनिया में सोशल नेटवर्किंग का तेजी से विस्तार हो रहा था और Orkut ने भारत सहित कई देशों में अपनी पहचान बनाई। हालांकि, बाद के वर्षों में फेसबुक जैसे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ने लगी। प्रतिस्पर्धा और बदलती इंटरनेट आदतों के बीच Orkut की लोकप्रियता धीरे-धीरे कम होती गई।
आखिरकार गूगल ने 30 सितंबर 2014 को Orkut सेवा बंद कर दी। इसके साथ ही एक ऐसे सोशल नेटवर्क का दौर समाप्त हो गया, जिसने लाखों लोगों को इंटरनेट पर दोस्त बनाने और अपनी पसंद के समूहों से जुड़ने का नया अनुभव दिया था। लेकिन अब इसके संस्थापक की नई पहल ने एक बार फिर इस पुराने नाम को सुर्खियों में ला दिया है।
ऑरकुट बुयुक्कोक्टेन का कहना है कि इंटरनेट को ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां वास्तविक दोस्ती, सकारात्मक बातचीत और लोगों के बीच जुड़ाव को महत्व मिले। उनकी नई पहल का उद्देश्य ऐसा सोशल नेटवर्क विकसित करना है, जहां लाइक, व्यूज और एल्गोरिदम की तुलना में वास्तविक मानवीय संबंधों को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए उन्होंने लोगों से समर्थन मांगा है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। Orkut के संस्थापक की नई पहल को पुराने Orkut प्लेटफॉर्म की आधिकारिक वापसी मान लेना अभी सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक नए सोशल नेटवर्क को लेकर समर्थन मांगा गया है। इसकी शुरुआत कब होगी, इसका नाम क्या होगा और क्या इसमें पुराने Orkut जैसी सुविधाएं मिलेंगी, इस बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।
फिलहाल, Orkut की वापसी की चर्चा ने पुराने इंटरनेट दौर की यादें जरूर ताजा कर दी हैं। अब देखना होगा कि क्या इसके संस्थापक ऐसा नया सोशल नेटवर्क बना पाते हैं, जो लोगों को फिर से दोस्ती, कम्युनिटी और वास्तविक बातचीत के उसी अनुभव से जोड़ सके।


