क्या भारत और बांग्लादेश के बीच तनावपूर्ण रिश्तों का असर अब क्षेत्रीय बैठकों पर भी दिखाई देने लगा है? नई दिल्ली में होने वाली बिम्सटेक गृह मंत्रियों की पहली बैठक में बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह गृह मामलों के वरिष्ठ सचिव मंजूर मोर्शेद चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बना हुआ है। ऐसे में बांग्लादेश के गृह मंत्री की गैरमौजूदगी को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित होने वाली इस बैठक में बिम्सटेक सदस्य देशों के गृह और आंतरिक मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत सोमवार से अधिकारियों की बैठक शुरू होने की जानकारी दी गई है, जबकि गृह मंत्रियों की मुख्य बैठक मंगलवार को प्रस्तावित है। इस बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाना है। बांग्लादेश की ओर से वरिष्ठ सचिव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी होगी, लेकिन गृह मंत्री स्वयं इसमें शामिल नहीं होंगे।
बिम्सटेक यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को एक मंच पर लाती है। इसमें भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। यह संगठन क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा, व्यापार, संपर्क व्यवस्था और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर काम करता है। गृह मंत्रियों की बैठक में आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, सीमा पार अपराध और सदस्य देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद का बैठक में शामिल न होना इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ समय से संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया था। इसके बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया। तब से दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद और संवाद की चुनौतियां सामने आती रही हैं।
भारत और बांग्लादेश के संबंध केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबी साझा सीमा है और व्यापार, परिवहन, ऊर्जा, जल संसाधन तथा सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग का महत्वपूर्ण इतिहास रहा है। सीमा पार अपराध, अवैध गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय दोनों देशों के लिए अहम हैं। ऐसे में बिम्सटेक जैसे क्षेत्रीय मंच पर दोनों देशों की भागीदारी सहयोग बनाए रखने का अवसर देती है। हालांकि, किसी बैठक में मंत्री की अनुपस्थिति के आधार पर उसके पीछे का कारण निश्चित रूप से बताना उचित नहीं होगा, जब तक संबंधित सरकार की ओर से इसकी स्पष्ट जानकारी न दी जाए।
इस घटनाक्रम के साथ बांग्लादेश के अन्य नेताओं की हालिया अंतरराष्ट्रीय बैठकों में गैरमौजूदगी का भी उल्लेख किया जा रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पिछले महीने तारिक रहमान ने भी बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में भारत सरकार से निमंत्रण मिलने के बावजूद नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में हिस्सा नहीं लिया था। हालांकि, इन अलग-अलग घटनाओं के पीछे के कारणों की आधिकारिक पुष्टि के बिना उन्हें एक ही राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानना सही नहीं होगा।
नई दिल्ली में होने वाली बैठक भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिम्सटेक क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करने का एक प्रमुख मंच है। सदस्य देशों के बीच संवाद जारी रहने से साझा चुनौतियों पर चर्चा और व्यावहारिक सहयोग के रास्ते खुले रह सकते हैं। बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी यह संकेत देती है कि देश बैठक में संस्थागत स्तर पर प्रतिनिधित्व बनाए रखेगा, भले ही गृह मंत्री स्वयं उपस्थित न हों।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बैठक के दौरान सदस्य देश किन मुद्दों पर सहमति बनाते हैं और भारत तथा बांग्लादेश के प्रतिनिधियों के बीच किस तरह का संवाद होता है। गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने से इस घटनाक्रम को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। फिलहाल यह मामला क्षेत्रीय कूटनीति और दोनों देशों के संबंधों के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग की दिशा यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि मौजूदा तनाव को कम करने के कितने अवसर उपलब्ध होते हैं।


