केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान भारतीय नागरिक नहीं हैं और उन्हें भारत के आंतरिक मामलों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों से दूर रहना चाहिए था। चिराग पासवान ने विदेशी नागरिकों के प्रदर्शनों में शामिल होने पर चिंता जताई और कहा कि लंबे समय तक भारत में काम करने से कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं बन जाता। मुंबई में एसआईआर के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद यह मामला चर्चा में है।
हाजीपुर से सांसद और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने रविवार को इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह एक कलाकार के रूप में इमरान खान के काम को पसंद करते हैं, लेकिन सार्वजनिक मुद्दों पर उनकी भागीदारी को लेकर उन्हें अपनी नागरिकता और जिम्मेदारियों को समझना चाहिए था। चिराग ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है और उनके इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने विदेशी नागरिकों के ऐसे प्रदर्शनों में शामिल होने पर सवाल उठाए।
चिराग पासवान ने अपने बयान में कहा कि यदि भारत के नागरिक किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन जब कोई विदेशी नागरिक देश के आंतरिक मामलों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में भाग लेता है, तो इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का हिस्सा होने के नाते उन्हें विदेशी ताकतों के समर्थन से देश में अराजकता फैलाने की कथित कोशिशों को लेकर चिंता है। हालांकि, विदेशी ताकतों की संलिप्तता से जुड़ा उनका आरोप एक राजनीतिक दावा है, जिसकी पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य आवश्यक होंगे।
दरअसल, मुंबई में एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के बाद अभिनेता इमरान खान का नाम चर्चा में आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इमरान खान के पास ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई कार्ड है। प्रदर्शन के बाद उन्हें लीव इंडिया नोटिस दिए जाने की बात भी सामने आई है। इस घटनाक्रम ने नागरिकता, विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों और भारत में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के अधिकार को लेकर बहस छेड़ दी है।
यहां यह समझना जरूरी है कि ओसीआई कार्ड भारतीय नागरिकता के समान नहीं होता। ओसीआई कार्ड धारकों को भारत में रहने और कुछ अन्य सुविधाओं का अधिकार मिलता है, लेकिन वे भारतीय नागरिक नहीं माने जाते। उनके अधिकार और प्रतिबंध संबंधित कानूनों तथा सरकारी नियमों के अनुसार निर्धारित होते हैं। किसी व्यक्ति के मामले में नोटिस जारी होने के कारणों और उसके कानूनी प्रभाव को समझने के लिए संबंधित आधिकारिक आदेश और परिस्थितियों की जानकारी आवश्यक है।
चिराग पासवान के बयान के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी चर्चा तेज होने की संभावना है। एक तरफ विदेशी नागरिकों की भारत में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। फिलहाल, इमरान खान से जुड़े मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।


