दवा बनाने वाली देश की प्रमुख कंपनी सन फार्मा के तिमाही नतीजे सामने आ गए हैं। कंपनी के कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन अधिग्रहण और कानूनी समझौते से जुड़े भारी खर्चों के कारण शुद्ध मुनाफे में बड़ी गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध मुनाफा 36.2 प्रतिशत घटकर 1,989 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी ने 3,116 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया था। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद कंपनी की कुल बिक्री और भारत में घरेलू कारोबार ने मजबूत प्रदर्शन किया है।
कंपनी की ओर से जारी वित्तीय नतीजों के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच सन फार्मा की कुल परिचालन आय 11.9 प्रतिशत बढ़कर 16,198.7 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में यह कंपनी के कारोबार में अच्छी वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, ऑर्गनॉन एंड कंपनी के अधिग्रहण की प्रक्रिया और अमेरिका में कानूनी मामले के समझौते से जुड़े खर्चों ने कंपनी के अंतिम मुनाफे पर दबाव डाला।
अगर इन विशेष खर्चों को अलग रखकर देखा जाए, तो कंपनी की वित्तीय तस्वीर कुछ बेहतर नजर आती है। सन फार्मा का समायोजित शुद्ध मुनाफा 1.4 प्रतिशत बढ़कर 3,162 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3,118 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि असाधारण खर्चों के बावजूद कंपनी के मुख्य कारोबार ने बढ़त बनाए रखी।
कंपनी की परिचालन कमाई में भी सुधार दर्ज किया गया। दूसरी तिमाही में ब्याज, कर, मूल्यह्रास और कर्ज चुकाने से पहले की कमाई यानी एबिटा 4.8 प्रतिशत बढ़कर 4,743.9 करोड़ रुपये रही। वहीं, एबिटा मार्जिन 29.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। असाधारण खर्चों से पहले कर देने से पूर्व मुनाफा 6.3 प्रतिशत बढ़कर 4,428.2 करोड़ रुपये पहुंच गया।
बाजार के हिसाब से प्रदर्शन देखें तो भारत में कंपनी का कारोबार सबसे मजबूत रहा। घरेलू दवा कारोबार की बिक्री 17.3 प्रतिशत बढ़कर 5,552.3 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी की कुल बिक्री में भारतीय बाजार की हिस्सेदारी 34.5 प्रतिशत रही। घरेलू बाजार में दवाओं की मांग और कारोबार में विस्तार ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी।
इसके विपरीत अमेरिकी बाजार में कंपनी की बिक्री 8.2 प्रतिशत घटकर 455 मिलियन डॉलर रह गई। कुल बिक्री में अमेरिकी बाजार का योगदान लगभग 27 प्रतिशत रहा। वहीं, उभरते बाजारों में बिक्री 7.6 प्रतिशत बढ़कर 350 मिलियन डॉलर पहुंच गई। इन बाजारों का कंपनी की कुल बिक्री में योगदान 20.7 प्रतिशत रहा। कंपनी की नई और विशेष दवाओं से होने वाली वैश्विक बिक्री भी 6.9 प्रतिशत बढ़कर 356 मिलियन डॉलर हो गई, जो कुल बिक्री का 21.1 प्रतिशत है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक कीर्ति गणोरकर ने कहा कि भारत, उभरते बाजारों और दुनिया के अन्य बाजारों में अच्छी मांग ने तिमाही के प्रदर्शन को मजबूती दी। कंपनी की रणनीति घरेलू कारोबार के विस्तार के साथ-साथ विशेष दवाओं और नए बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर केंद्रित है।
मुनाफे में गिरावट की प्रमुख वजहों में ऑर्गनॉन के प्रस्तावित अधिग्रहण से जुड़े 346.16 करोड़ रुपये के खर्च शामिल हैं। इनमें कानूनी सलाह, जरूरी जांच, दस्तावेजी प्रक्रिया और सौदे से संबंधित अन्य खर्च शामिल हैं। कंपनी ने संकेत दिया है कि आने वाली तिमाहियों में भी अधिग्रहण से जुड़े कुछ अतिरिक्त खर्च सामने आ सकते हैं।
इसके अलावा, कंपनी की तीन सहायक कंपनियों ने अमेरिका में जेनेरिक दवाओं की कीमतों से जुड़े मुकदमे में 10 सितंबर 2026 को समझौता किया। इस समझौते के तहत 922.67 करोड़ रुपये की रकम तय हुई, जिसमें कानूनी खर्च भी शामिल हैं। कंपनी ने इस मामले में 95.34 करोड़ रुपये का कर लाभ दर्ज किया।
नई दवाओं के मोर्चे पर भी कंपनी को महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिली हैं। सन फार्मा की दवा इलुम्या को अमेरिका में सक्रिय सोरियाटिक गठिया से पीड़ित वयस्कों के इलाज के लिए मंजूरी मिली है। वहीं, अनलोक्ससाइट को त्वचा के एक प्रकार के कैंसर के गंभीर मामलों के उपचार के लिए अमेरिकी कैंसर दिशानिर्देश संस्था की ओर से पसंदीदा दवा के रूप में सिफारिश मिली है।
कंपनी ने अमेरिका और चीन को छोड़कर अन्य बाजारों में हृदय रोग से संबंधित दवा लेरोडालसिबेप के अधिकार भी हासिल किए हैं। यूरोपीय संघ में इसकी बिक्री की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी ने शोध और नई दवाओं के विकास पर 778.4 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कुल बिक्री का 4.8 प्रतिशत है।
शेयर बाजार में कंपनी के नतीजों को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। शुक्रवार दोपहर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सन फार्मा का शेयर 4.2 प्रतिशत बढ़कर 1,835 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इस साल अब तक कंपनी के शेयर में 4.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 11.9 प्रतिशत की गिरावट आई।
कुल मिलाकर सन फार्मा के तिमाही नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी की बिक्री और भारतीय कारोबार में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन अधिग्रहण और कानूनी समझौते से जुड़े खर्चों ने शुद्ध मुनाफे को प्रभावित किया। अब निवेशकों की नजर कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों, अमेरिकी बाजार में कारोबार की स्थिति और नए उत्पादों से होने वाली कमाई पर रहेगी।


