जापान के हिरोशिमा शहर में अमेरिका द्वारा किए गए ऐतिहासिक परमाणु हमले की 81वीं बरसी पर गुरुवार को शांति स्मारक पार्क में एक भावुक और ऐतिहासिक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर हिरोशिमा के महापौर काजुमी मात्सुई ने दुनिया की बड़ी शक्तियों द्वारा परमाणु हथियारों को सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता का साधन मानने की प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया ने इतिहास से सबक नहीं लिया, तो भविष्य में फिर किसी हिरोशिमा या नागासाकी जैसी त्रासदी दोहराई जा सकती है।
हिरोशिमा शांति स्मारक पार्क में आयोजित इस समारोह में अमेरिका, ईरान सहित लगभग 120 देशों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा करीब 50,000 लोग शांति और परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया की कामना के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। यह आयोजन उन लाखों लोगों की स्मृति को समर्पित था, जो वर्ष 1945 में हुए परमाणु हमले से प्रभावित हुए थे।
समारोह के दौरान सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर विशेष घंटी बजाई गई। यही वह समय था, जब 6 अगस्त 1945 को अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर हमले में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। पूरे वातावरण में शांति और संवेदना का भाव दिखाई दिया।
अपने शांति संदेश में महापौर काजुमी मात्सुई ने कहा कि आज भी दुनिया के कई राजनीतिक नेता परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को एक व्यावहारिक नीति मानते हैं और सैन्य शक्ति को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों की अमानवीयता को कम करके आंकना और हिंसा को स्वीकार करना दुनिया को एक बार फिर विनाश के रास्ते पर ले जा सकता है। उनके अनुसार, इस सोच से हिंसा और प्रतिशोध का ऐसा चक्र शुरू हो सकता है, जिसका परिणाम बेहद भयावह होगा।
मात्सुई ने लोगों और विश्व नेताओं से अपील की कि वे अतीत की त्रासदी से सीख लें और परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया बनाने के लिए सक्रिय प्रयास करें। उन्होंने कहा कि शांति केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
इस वर्ष का समारोह इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार हिरोशिमा स्मृति समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जापान संयुक्त राष्ट्र की परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने संबंधी संधि (NPT) के दायरे में रहकर ऐसे विश्व के निर्माण के लिए व्यावहारिक प्रयास करेगा, जहां परमाणु हथियारों का कभी इस्तेमाल न हो।
हालांकि समारोह ऐसे समय आयोजित हुआ, जब जापान की नई सुरक्षा और रक्षा नीति को लेकर चर्चा तेज है। मीडिया रिपोर्टों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार वर्ष के अंत तक नई रक्षा नीति तैयार कर सकती है, जिसमें जापान के युद्धोत्तर तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों को लेकर कुछ बदलावों पर विचार किया जा सकता है। इस संभावना ने शांति समर्थकों और परमाणु हमले के जीवित बचे लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु हमलों के जीवित बचे लोगों ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने की अपील की। उनका कहना है कि दुनिया के कई देशों में प्रतिरोधक क्षमता के नाम पर परमाणु हथियारों के समर्थन में बढ़ोतरी चिंताजनक है। उन्होंने आग्रह किया कि विश्व समुदाय इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों से सबक लेकर शांति और निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए।
हिरोशिमा की 81वीं बरसी केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह याद दिलाने का अवसर भी है कि युद्ध और परमाणु हथियार कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते। शांति, संवाद और कूटनीति ही मानवता के सुरक्षित भविष्य का सबसे मजबूत आधार हैं।


