यमन में जारी तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि हालिया हमलों और बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने यमन में एक बार फिर बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू होने का खतरा बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है, जब देश में अलग-अलग पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
ग्रुंडबर्ग के मुताबिक, हाल के हमले 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद सैन्य गतिविधियों में हुई सबसे बड़ी तेजी के बीच हुए हैं। उनके मुताबिक, जिस तरह से हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं, उससे लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के दोबारा बड़े युद्ध में बदलने की आशंका पैदा हो गई है।
इस बीच यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने मोखा में हुए हमले को लेकर जानकारी दी है। सेना के मुताबिक, इस हमले में सात लोगों की मौत हुई है। मृतकों में चार सैनिक और तीन आम नागरिक शामिल बताए गए हैं। हमले में कम से कम 30 अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
मोखा में हिंसा का यह पहला गंभीर मामला नहीं है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को इसी इलाके में हुए हमलों के एक पिछले दौर में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने स्थानीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यमन पहले भी लंबे समय तक चले गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर चुका है। अलग-अलग पक्षों के बीच संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर गंभीर असर डाला है। ऐसे में सैन्य गतिविधियों में नई तेजी को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
हंस ग्रुंडबर्ग ने मौजूदा हालात को लेकर चेतावनी देते हुए संकेत दिया है कि अगर सैन्य गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। 2022 के युद्धविराम के बाद यमन में व्यापक स्तर पर हिंसा में कमी देखने को मिली थी, लेकिन हालिया घटनाओं ने उस स्थिरता को लेकर फिर से चिंता पैदा कर दी है।
यमन में संघर्ष के दोबारा बड़े स्तर पर शुरू होने का असर सिर्फ वहां के लोगों तक सीमित नहीं रह सकता। देश की रणनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र लगातार सभी पक्षों से संयम बरतने और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील करता रहा है।
फिलहाल मोखा में हुए हमलों के बाद हालात पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बढ़ती सैन्य गतिविधियों को रोककर यमन में बनी अपेक्षाकृत शांति को बरकरार रखा जा सकेगा या फिर देश एक बार फिर बड़े पैमाने के संघर्ष की ओर बढ़ेगा। आने वाले दिनों में सैन्य गतिविधियों और संबंधित पक्षों के फैसले इस स्थिति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


