झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का जामताड़ा में हुआ एनकाउंटर अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। पुलिस के मुताबिक, जेल से दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने के दौरान पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया था। इसी दौरान कथित तौर पर सुजीत सिन्हा ने पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया और भागने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि उसने टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और उसकी मौत हो गई।
सुजीत सिन्हा को झारखंड के कुख्यात अपराधियों में गिना जाता था। उसका नाम कई आपराधिक मामलों और संगठित अपराध से जुड़ा रहा है। लेकिन जेल से शिफ्टिंग के दौरान हुई उसकी मौत ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया। इस एनकाउंटर की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि घटनाक्रम के कुछ हिस्से 2020 में कानपुर के कुख्यात अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर की याद दिलाते हैं।
विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, रास्ते में पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया था। इसके बाद पुलिस ने दावा किया था कि विकास दुबे ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे मारा गया था। उस समय भी पुलिस की गाड़ी, भागने की कोशिश और फायरिंग का घटनाक्रम देशभर में चर्चा का विषय बना था।
अब सुजीत सिन्हा के मामले में भी पुलिस वाहन इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, जेल से शिफ्टिंग के दौरान वाहन का टायर पंचर हो गया। इसके बाद जब कैदी को दूसरे वाहन में ले जाने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी कथित तौर पर सुजीत सिन्हा ने पुलिस का हथियार छीन लिया और वहां से भागने की कोशिश की।
पुलिस का दावा है कि भागने के दौरान सुजीत सिन्हा ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस के दावे और परिवार की ओर से उठाए गए सवालों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
सुजीत सिन्हा के परिवार की ओर से पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए जाने की बात भी सामने आई है। परिवार की तरफ से यह सवाल उठाया गया कि अगर सुजीत जेल में था और उसे पुलिस की निगरानी में दूसरी जगह ले जाया जा रहा था, तो वह अचानक हथियार छीनकर भागने की कोशिश क्यों करेगा। इन सवालों के कारण अब एनकाउंटर की परिस्थितियों को लेकर जांच और साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
मामले की जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, हथियार, फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम हो सकते हैं। इन्हीं के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि घटनास्थल पर घटनाक्रम किस तरह हुआ था और पुलिस की ओर से बताए गए दावे की पुष्टि किस हद तक होती है।
सुजीत सिन्हा का नाम झारखंड के अपराध जगत में काफी समय से चर्चा में रहा है। उसका संबंध दूसरे कुख्यात गैंगस्टरों से भी बताया जाता रहा है। ऐसे में उसकी मौत को झारखंड में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के एक बड़े घटनाक्रम के तौर पर भी देखा जा रहा है।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुजीत सिन्हा की मौत वास्तव में पुलिस द्वारा बताए गए घटनाक्रम के मुताबिक हुई या जांच में कोई दूसरी तस्वीर सामने आती है। पुलिस इसे हथियार छीनकर भागने और फायरिंग के बाद हुई जवाबी कार्रवाई बता रही है, जबकि परिवार की ओर से सवाल उठाए गए हैं। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
विकास दुबे के एनकाउंटर की तरह ही इस मामले में भी पुलिस वाहन, भागने की कोशिश और जवाबी फायरिंग जैसे पहलू चर्चा में हैं। हालांकि दोनों घटनाओं को पूरी तरह एक जैसा मानना सही नहीं होगा। अब सबकी नजर जांच के नतीजों पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि जामताड़ा में सुजीत सिन्हा के साथ आखिर उस दिन हुआ क्या था।


