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Income Tax Alert: REIT-InvIT से कमाई पर बदल रहे टैक्स नियम! ITR भरते समय इनकम के हर हिस्से का रखें खास ध्यान

रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट यानी REIT और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट यानी InvIT में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए टैक्स से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। प्रस्तावित बदलावों के बाद इन निवेशों से मिलने वाली रकम की टैक्स गणना को लेकर निवेशकों को पहले से ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। खास तौर पर लाभांश, ब्याज, किराये से होने वाली आय और मूलधन की वापसी को एक ही तरह की कमाई मानना सही नहीं होगा।

REIT और InvIT से निवेशकों को मिलने वाली रकम कई अलग-अलग हिस्सों में हो सकती है। इसमें ब्याज, लाभांश, किराये से संबंधित आय और मूल रकम की वापसी शामिल हो सकती है। इन सभी घटकों पर आयकर के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए ITR दाखिल करते समय पूरी प्राप्त रकम को एक साथ जोड़कर टैक्स योग्य या टैक्स मुक्त मान लेना निवेशक के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

प्रस्तावित कर बदलावों का एक महत्वपूर्ण पहलू लाभांश के टैक्स ट्रीटमेंट से जुड़ा है। इसका उद्देश्य REIT और InvIT से मिलने वाले लाभांश की कर व्यवस्था को सरल बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इन ट्रस्टों से मिलने वाली पूरी रकम टैक्स फ्री हो जाएगी। निवेशकों को हर आय के स्रोत को अलग-अलग समझना होगा।

टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, कई निवेशक ट्रस्ट से मिले पूरे वितरण को एक ही मद में दिखाने की गलती कर देते हैं। जबकि ब्याज से मिलने वाली रकम, लाभांश और दूसरी आय का टैक्स ट्रीटमेंट अलग हो सकता है। इसलिए निवेशकों को ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए गए वितरण विवरण को ध्यान से देखना चाहिए और उसी के आधार पर ITR में रकम को सही श्रेणी में दर्ज करना चाहिए।

REIT और InvIT से मिलने वाली ब्याज आय आम तौर पर निवेशक की लागू टैक्स दर के अनुसार कर के दायरे में आ सकती है। वहीं, कुछ परिस्थितियों में स्रोत पर कर कटौती यानी TDS भी हो सकती है। इसलिए सिर्फ TDS कटने को अंतिम टैक्स देनदारी मानना सही नहीं है। ITR दाखिल करते समय वास्तविक आय और लागू नियमों के अनुसार अंतिम टैक्स की गणना करनी चाहिए।

किराये से जुड़ी आय का मामला भी अलग हो सकता है। REIT के जरिए मिलने वाली कुछ किराये की आय निर्धारित पास-थ्रू व्यवस्था के तहत निवेशक तक पहुंच सकती है। ऐसे में निवेशक को यह देखना जरूरी है कि उसके वितरण विवरण में किराये से जुड़ी रकम किस रूप में दिखाई गई है और ITR में उसे किस तरह रिपोर्ट करना है।

इसी तरह अगर निवेशक को मूलधन या कर्ज की रकम वापस मिलती है तो उसे हर स्थिति में तत्काल आय मानना जरूरी नहीं होता। लेकिन ऐसी रकम भविष्य में यूनिट की लागत और पूंजीगत लाभ की गणना को प्रभावित कर सकती है। इसलिए मूलधन की वापसी को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी सही तरीका नहीं होगा।

REIT और InvIT की यूनिट बेचने पर होने वाले पूंजीगत लाभ के नियम भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। निवेश की अवधि और लागू कर प्रावधानों के आधार पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का अलग-अलग टैक्स ट्रीटमेंट हो सकता है। इसलिए यूनिट बेचने वाले निवेशकों को खरीद की कीमत, बिक्री मूल्य और निवेश की अवधि का पूरा रिकॉर्ड रखना चाहिए।

ITR दाखिल करते समय निवेशकों को ट्रस्ट की ओर से दिए गए वितरण विवरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसमें कुल रकम के अलग-अलग हिस्सों की जानकारी होती है। यह देखना जरूरी है कि कितना हिस्सा ब्याज का है, कितना लाभांश का है, कितना किराये से जुड़ा है और कितना मूलधन या किसी अन्य श्रेणी में आता है।

अगर निवेशक ने एक से ज्यादा REIT या InvIT में पैसा लगाया है तो सभी निवेशों से मिलने वाली रकम का अलग-अलग रिकॉर्ड रखना और भी जरूरी हो जाता है। हर ट्रस्ट से मिलने वाले वितरण विवरण को ध्यान से देखकर ही ITR में जानकारी दर्ज करनी चाहिए। इससे आय के गलत वर्गीकरण और टैक्स की गलत गणना से बचने में मदद मिल सकती है।

भारत में REIT और InvIT जैसे निवेश विकल्पों में लोगों की रुचि बढ़ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए सिर्फ रिटर्न पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है। निवेश से मिलने वाली आय पर लागू टैक्स नियमों को समझना भी उतना ही जरूरी है। खास तौर पर ITR दाखिल करते समय किसी भी रकम को सिर्फ इसलिए टैक्स फ्री नहीं मानना चाहिए क्योंकि वह REIT या InvIT से प्राप्त हुई है।

कुल मिलाकर, REIT और InvIT से मिलने वाली पूरी रकम को टैक्स फ्री मानना सही नहीं होगा। निवेशकों को वितरण विवरण और दूसरे टैक्स दस्तावेजों के आधार पर हर हिस्से की अलग पहचान करनी चाहिए। ITR में आय को सही श्रेणी में दिखाना जरूरी है, ताकि भविष्य में गलत रिपोर्टिंग, नोटिस या अतिरिक्त टैक्स भुगतान जैसी स्थिति से बचा जा सके।

अगर किसी निवेशक को अपनी REIT या InvIT आय के वर्गीकरण या टैक्स गणना को लेकर संदेह है, तो ITR दाखिल करने से पहले किसी योग्य टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। खासकर बड़ी रकम के निवेश या यूनिट बेचने की स्थिति में दस्तावेजों के आधार पर सही गणना करना बेहद जरूरी है।

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