भारतीय शतरंज के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञाननंदा ने ग्रैंड शतरंज टूर की प्रतिष्ठित प्रतियोगिता सिंकफील्ड कप में शानदार शुरुआत की है। टूर्नामेंट के पहले दौर में प्रज्ञाननंदा ने अमेरिका के सैमुअल सेवियन के खिलाफ ब्लैक मोहरों से खेलते हुए बाजी ड्रॉ कराई। 48 चालों तक चली इस मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी, लेकिन किसी को भी निर्णायक बढ़त नहीं मिल सकी। प्रज्ञाननंदा के लिए यह शुरुआत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि काले मोहरों से खेलते हुए उन्होंने पूरे मुकाबले में संयम और रणनीतिक मजबूती दिखाई और कोई बड़ी गलती नहीं की।
सिंकफील्ड कप में इस बार 10 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं और प्रतियोगिता नौ दौर की है। पहले दौर के मुकाबलों में फैबियानो कारुआना एकमात्र ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने जीत हासिल की। उन्होंने नीदरलैंड के जॉर्डन वान फोरेस्ट को हराकर टूर्नामेंट में शुरुआती बढ़त बना ली है। कारुआना ने मुकाबले के दौरान धैर्य बनाए रखा और आखिरी चरण में अपने प्रतिद्वंद्वी की गलती का फायदा उठाते हुए पूरा अंक हासिल किया।
प्रज्ञाननंदा और सैमुअल सेवियन के बीच मुकाबला अपेक्षाकृत संतुलित रहा। ब्लैक मोहरों से खेल रहे भारतीय खिलाड़ी ने शुरुआत से ही अपनी स्थिति को मजबूत रखने पर ध्यान दिया। सेवियन ने भी जल्दबाजी में कोई बड़ा जोखिम नहीं लिया। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, दोनों खिलाड़ियों की स्थिति ऐसी रही कि किसी के लिए भी स्पष्ट जीत का रास्ता बनाना मुश्किल हो गया।
48 चालों के बाद दोनों खिलाड़ी ड्रॉ के लिए सहमत हो गए। इस नतीजे से दोनों खिलाड़ियों को आधा-आधा अंक मिला। प्रज्ञाननंदा के लिए यह परिणाम सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि काले मोहरों से खेलते हुए शुरुआती दौर में आधा अंक हासिल करना टूर्नामेंट की लंबी यात्रा के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। खास बात यह रही कि भारतीय ग्रैंडमास्टर ने मुकाबले के दौरान अनावश्यक जोखिम लेने से परहेज किया।
पहले दौर के अन्य मुकाबलों में विश्व चैंपियनशिप के दावेदार उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव और अमेरिकी खिलाड़ी लेवोन अरोनियन के बीच मुकाबला भी ड्रॉ रहा। जर्मनी के विंसेंट कीमर और अमेरिका के वेस्ली सो ने भी एक-दूसरे को बराबरी पर रोका। इसके अलावा नीदरलैंड के अनीश गिरी और फ्रांस के मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव के बीच खेला गया मुकाबला भी ड्रॉ पर समाप्त हुआ।
पहले दौर के बाद कारुआना तीन अंकों के साथ सबसे आगे हैं, जबकि बाकी खिलाड़ियों ने आधे-आधे अंक के साथ अपने अभियान की शुरुआत की है। सिंकफील्ड कप में क्लासिकल शतरंज के मुकाबलों के लिए तीन अंक की जीत और एक अंक की ड्रॉ वाली स्कोरिंग व्यवस्था के कारण शुरुआती जीत का महत्व काफी बढ़ जाता है। ऐसे में कारुआना ने पहले ही दौर में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाने में सफलता हासिल कर ली है।
फैबियानो कारुआना ने जॉर्डन वान फोरेस्ट के खिलाफ 55 चालों तक चले मुकाबले में अपनी तकनीकी क्षमता का परिचय दिया। लंबे समय तक दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला, लेकिन अंतिम चरण में फोरेस्ट से हुई गलती का कारुआना ने फायदा उठाया और मुकाबला अपने नाम कर लिया।
अब प्रज्ञाननंदा की नजर अगले दौर पर होगी। सिंकफील्ड कप में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ लगातार मुकाबले खेलने का मौका उन्हें मिल रहा है। पहले दौर में ड्रॉ के साथ शुरुआत करने के बाद भारतीय ग्रैंडमास्टर के सामने अब चुनौती होगी कि वह अगले मुकाबलों में अपनी स्थिति को और मजबूत करें और जीत के लिए जरूरी मौके तलाशें। टूर्नामेंट जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, कारुआना की शुरुआती बढ़त और प्रज्ञाननंदा समेत बाकी खिलाड़ियों की वापसी पर सभी की नजर रहेगी।


