फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी शर्तें रख दी हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल यानी SNSC के नए प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिका ईरान की मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने का फैसला नहीं लिया जाएगा।
मोहसिन रेज़ाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए ईरान का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को सबसे पहले युद्ध और नाकेबंदी समाप्त करनी होगी। इसके साथ ही ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना होगा और लेबनान तथा गाजा सहित पूरे क्षेत्र में युद्धविराम के लिए सहमत होना होगा। ईरान के इस बयान के बाद फारस की खाड़ी में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती है। यही वजह है कि होर्मुज़ में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
ईरान की ओर से आई इस चेतावनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने की नीति अपनाता रहा है। वहीं ईरान भी लगातार यह संकेत देता रहा है कि वह अपने रणनीतिक हितों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
मोहसिन रेज़ाई की ओर से रखी गई शर्तों से यह भी साफ होता है कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य के मुद्दे को सिर्फ समुद्री यातायात के सवाल के रूप में नहीं देख रहा है। तेहरान इसे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष और अमेरिका की नीतियों से जोड़कर देख रहा है। ईरान चाहता है कि अमेरिका युद्ध और नाकेबंदी खत्म करने के साथ-साथ उसकी आर्थिक संपत्तियों को भी जारी करे।
अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में लंबे समय तक तनाव बना रहता है और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी आने की संभावना बढ़ सकती है और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। खासकर वे देश जो खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और गैस का आयात करते हैं, उनके लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर है। एक तरफ ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है, तो दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख सामने आ रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश सीधे टकराव की तरफ बढ़ेंगे या फिर बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने का रास्ता निकाला जाएगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके पीछे सिर्फ समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध, जमी हुई संपत्तियां और गाजा तथा लेबनान जैसे क्षेत्रीय मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर फारस की खाड़ी से लेकर वैश्विक तेल बाजार तक देखने को मिल सकता है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता बना हुआ है।


