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सहारनपुर में अनोखी पहल! गोबर से बन रहे तिरंगा बैज और तुलसी वाली राखियां, सिर्फ ₹10 में देशभक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण

सहारनपुर में देशभक्ति और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाली एक अनोखी पहल सामने आई है। नगर निगम द्वारा संचालित मां शाकंभरी कान्हा गौशाला में गाय के गोबर से तिरंगा चेस्ट बैज और राखियां तैयार की जा रही हैं। 15 अगस्त और रक्षाबंधन को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे इन उत्पादों की खासियत यह है कि इन्हें पर्यावरण के अनुकूल तरीके से बनाया जा रहा है। महज 10 रुपये की कीमत वाले इन उत्पादों को लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से खरीद सकते हैं।

गौशाला में गोवंश संरक्षण के साथ-साथ गोबर के बेहतर इस्तेमाल को लेकर लगातार अलग-अलग प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस बार स्वतंत्रता दिवस के लिए तिरंगा चेस्ट बैज और रक्षाबंधन के लिए विशेष राखियां तैयार की जा रही हैं। इन उत्पादों को बनाने का उद्देश्य केवल बिक्री करना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना भी है।

इस साल गौशाला की ओर से करीब 5 हजार तिरंगा बैज और राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लोग अपनी देशभक्ति का संदेश इन खास बैज के जरिए दे सकेंगे। वहीं रक्षाबंधन के लिए तैयार की जा रही राखियों को भी खास तरीके से बनाया गया है, जिससे त्योहार के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंच सके।

इन राखियों की सबसे खास बात इनमें डाले गए तुलसी के बीज हैं। राखी इस्तेमाल करने के बाद इसे फेंकने के बजाय मिट्टी में लगाया जा सकता है। उचित परिस्थितियों में इससे तुलसी का पौधा उग सकता है। इस तरह राखी केवल भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं रहेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगी।

वहीं गोबर से तैयार किए जा रहे तिरंगा चेस्ट बैज भी पर्यावरण के लिहाज से खास बताए जा रहे हैं। इस्तेमाल के बाद इन बैज को प्राकृतिक तरीके से खाद में बदला जा सकता है। इससे ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है जो उपयोग के बाद कचरे का बोझ बढ़ाने के बजाय दोबारा प्रकृति में शामिल हो सकें।

इन उत्पादों की कीमत भी आम लोगों की पहुंच में रखी गई है। बताया गया है कि तिरंगा बैज और राखियां करीब 10 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही हैं। कम कीमत होने के कारण लोग इन्हें आसानी से खरीद सकते हैं। उत्पादों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बेचने की व्यवस्था की गई है और बाजार में इनकी मांग भी देखने को मिल रही है।

इस पहल के पीछे एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य गोबर को केवल अपशिष्ट मानने की सोच को बदलना है। गौशालाओं में बड़ी मात्रा में गोबर उपलब्ध होता है। यदि इसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो इससे कई उपयोगी और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। सहारनपुर की इस गौशाला में इसी दिशा में प्रयोग किए जा रहे हैं।

15 अगस्त के मौके पर तिरंगा बैज के जरिए देशभक्ति का संदेश और रक्षाबंधन पर तुलसी के बीज वाली राखियों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश एक साथ लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यह पहल इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें त्योहार, परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल एक साथ जुड़ता दिखाई दे रहा है।

गौशाला में तैयार किए जा रहे इन उत्पादों को लेकर लोगों की दिलचस्पी भी सामने आ रही है। अगर इस तरह के पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को लोगों का समर्थन मिलता है, तो भविष्य में गोबर से बने अन्य उपयोगी सामानों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

सहारनपुर की यह पहल यह संदेश देती है कि देशभक्ति और पर्यावरण संरक्षण को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। 15 अगस्त पर सीने पर सजने वाला 10 रुपये का तिरंगा बैज और रक्षाबंधन पर कलाई पर बंधने वाली तुलसी वाली राखी इसी सोच का उदाहरण बनकर सामने आई है।

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