भारतीय वायु सेना अपने पुराने हो चुके कार्गो विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 60 मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने के उद्देश्य से करीब एक लाख करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। इस बड़े रक्षा सौदे में कई भारतीय कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है और माना जा रहा है कि इससे भारत के एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोग्राम के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL, टाटा और महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियों को टेंडर जारी किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय कंपनियों की भागीदारी को प्रमुखता दी जा रही है। इसका उद्देश्य केवल वायु सेना की परिवहन क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि देश में सैन्य विमानों के निर्माण और तकनीकी क्षमता को मजबूत करना भी है।
भारतीय वायु सेना को ऐसे विमानों की जरूरत लंबे समय से महसूस होती रही है, जो सैनिकों, सैन्य उपकरणों और अन्य जरूरी सामान को लंबी दूरी तक तेजी से पहुंचा सकें। मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट इसी तरह के कई कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल रणनीतिक परिवहन, सैन्य लॉजिस्टिक्स और विभिन्न ऑपरेशनल मिशनों में किया जा सकता है।
इस मेगा प्रोग्राम में टाटा और महिंद्रा के बीच मुकाबला खास तौर पर चर्चा में है। महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्रेयर के साथ मिलकर C-390 मिलेनियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को भारतीय वायु सेना के सामने पेश करने की दिशा में समझौता किया है। C-390 को आधुनिक मल्टी-मिशन सैन्य परिवहन विमान के तौर पर जाना जाता है।
दूसरी तरफ टाटा समूह की ओर से अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ मिलकर C-130 विमान को इस जरूरत के लिए पेश करने की योजना बताई गई है। C-130J सुपर हरक्यूलिस भारतीय वायु सेना के बेड़े में पहले से शामिल है और इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य भूमिकाओं में किया जाता है।
भारतीय वायु सेना के पास फिलहाल 12 C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान मौजूद हैं। इन विमानों ने भारतीय सैन्य अभियानों और रणनीतिक परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में अगर इसी प्लेटफॉर्म से जुड़े नए विमानों को लेकर प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो मौजूदा अनुभव और लॉजिस्टिक व्यवस्था का भी फायदा मिल सकता है।
इसके साथ ही भारतीय वायु सेना एयरबस के साथ C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम पर भी काम कर रही है। इस प्रोग्राम के तहत बड़ी संख्या में C-295 विमानों को भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाना है और इनमें से अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में किए जाने की योजना है। इससे देश में सैन्य विमान निर्माण की क्षमता और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
C-295 प्रोग्राम के अलावा 60 नए मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का प्रस्ताव भारतीय वायु सेना की एयरलिफ्ट क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पुराने विमानों को धीरे-धीरे हटाकर आधुनिक और ज्यादा सक्षम विमानों को शामिल करना वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण है।
इस टेंडर की सबसे खास बात यह है कि इसमें भारतीय कंपनियों की भूमिका को प्राथमिकता दी जा रही है। अगर यह परियोजना बड़े पैमाने पर भारत में उत्पादन तक पहुंचती है, तो इससे देश में विमान निर्माण, तकनीकी कौशल, रोजगार और रक्षा क्षेत्र से जुड़े छोटे-बड़े उद्योगों को फायदा हो सकता है।
टाटा और महिंद्रा के अलावा HAL जैसी कंपनी की मौजूदगी भी इस पूरी प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बनाती है। भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन और निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट इसी नीति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 60 विमानों के इस मेगा टेंडर में आखिर बाजी कौन मारता है। क्या C-390 मिलेनियम के साथ महिंद्रा-एम्ब्रेयर की जोड़ी आगे निकलती है या C-130 प्लेटफॉर्म के साथ टाटा-लॉकहीड मार्टिन को फायदा मिलता है? वहीं HAL की भूमिका भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और अंतिम चयन कई तकनीकी, परिचालन और वित्तीय मानकों के आधार पर किया जाएगा। करीब एक लाख करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव को भारतीय वायु सेना के परिवहन बेड़े के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस टेंडर को लेकर सामने आने वाले फैसले पर रक्षा क्षेत्र की नजर बनी रहेगी।


