ऑयली स्किन को लेकर लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां होती हैं। इनमें सबसे आम धारणा यह है कि अगर त्वचा पहले से ही ऑयली है, तो उस पर मॉइश्चराइजर लगाने की कोई जरूरत नहीं है। कई लोग यह सोचकर मॉइश्चराइजर छोड़ देते हैं कि इससे चेहरा और ज्यादा चिपचिपा हो जाएगा या पिंपल्स बढ़ जाएंगे। लेकिन ऑयली त्वचा के मामले में तेल और नमी को एक ही चीज समझना सही नहीं है।
दरअसल, त्वचा पर मौजूद ऑयल यानी सीबम और स्किन की नमी दो अलग-अलग चीजें हैं। किसी व्यक्ति की त्वचा बाहर से काफी ऑयली दिखाई दे सकती है, लेकिन इसके बावजूद त्वचा में पर्याप्त हाइड्रेशन की कमी हो सकती है। ऐसे में मॉइश्चराइजर त्वचा को जरूरी नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है।
ऑयली स्किन पर मॉइश्चराइजर लगाने से त्वचा का बैलेंस बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अगर त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई हो जाए तो शरीर प्राकृतिक तौर पर ज्यादा ऑयल बनाने की कोशिश कर सकता है। इसलिए ऑयली स्किन को पूरी तरह से मॉइश्चराइजर से दूर रखना जरूरी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि अपनी त्वचा के अनुसार सही प्रोडक्ट चुना जाए।
ऑयली स्किन वालों को आमतौर पर हल्के टेक्सचर वाले मॉइश्चराइजर पसंद आ सकते हैं। जेल बेस्ड या हल्के, नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर ऐसे लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। नॉन-कॉमेडोजेनिक का मतलब ऐसे उत्पादों से है जिन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि वे पोर्स को बंद करने की संभावना कम रखें।
मॉइश्चराइजर खरीदते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि उस पर ऑयली स्किन के लिए लिखा है या नहीं। प्रोडक्ट के इंग्रीडिएंट्स और अपनी त्वचा की जरूरत को भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर किसी प्रोडक्ट को लगाने के बाद लगातार जलन, लालिमा, खुजली या ब्रेकआउट जैसी समस्या दिखाई देती है, तो उसका इस्तेमाल रोककर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर हो सकता है।
ऑयली स्किन के लिए स्किन केयर रूटीन में क्लीनिंग भी महत्वपूर्ण है। चेहरे को बहुत ज्यादा बार या बहुत कठोर तरीके से साफ करने से त्वचा में जलन और रूखापन बढ़ सकता है। इसलिए त्वचा को उसकी जरूरत के अनुसार हल्के क्लींजर से साफ करना बेहतर माना जाता है।
मॉइश्चराइजर लगाने का सही समय भी महत्वपूर्ण है। चेहरा साफ करने के बाद त्वचा को हल्का नम रखते हुए मॉइश्चराइजर लगाया जा सकता है। इससे त्वचा में नमी को बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी नए प्रोडक्ट को पूरे चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना उपयोगी हो सकता है।
ऑयली स्किन वालों को एक और आम गलती से बचना चाहिए और वह है केवल ऑयल कंट्रोल पर ध्यान देना। अगर स्किन केयर रूटीन में लगातार ऐसे प्रोडक्ट इस्तेमाल किए जाएं जो त्वचा को बहुत ज्यादा ड्राई कर दें, तो त्वचा का बैरियर प्रभावित हो सकता है। इसलिए ऑयल को नियंत्रित करने के साथ-साथ त्वचा की नमी और बैरियर का ध्यान रखना भी जरूरी है।
दिन के समय स्किन केयर करते हुए सनस्क्रीन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऑयली स्किन के लिए हल्का और नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन चुना जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार पिंपल्स, अत्यधिक ऑयलीनेस या त्वचा संबंधी दूसरी समस्या रहती है, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा बेहतर विकल्प है।
कुल मिलाकर ऑयली स्किन होने का मतलब यह नहीं है कि मॉइश्चराइजर की जरूरत खत्म हो जाती है। सही मॉइश्चराइजर त्वचा को हाइड्रेट रखने और स्किन बैरियर को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। इसलिए मॉइश्चराइजर छोड़ने के बजाय अपनी त्वचा के हिसाब से सही टेक्सचर और फॉर्मूला चुनना ज्यादा जरूरी है।


