गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने और युद्धविराम की दिशा में एक बार फिर कूटनीतिक कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है। इसी सिलसिले में अमेरिकी वार्ताकार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने रविवार को हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या से मुलाकात की। इस बैठक को गाजा में संघर्ष विराम की कोशिशों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कुशनर की यह मुलाकात अमेरिका समर्थित 15 सूत्री शांति योजना को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। इस योजना में गाजा में युद्ध की स्थिति खत्म करने और आगे की व्यवस्था को लेकर कई प्रस्ताव शामिल हैं। योजना के तहत हमास से हथियार छोड़ने की मांग की गई है, जबकि इजराइल से युद्ध से तबाह गाजा से अपनी सेना वापस बुलाने की बात कही गई है।
कुशनर और हमास नेता खलील अल-हय्या के बीच हुई बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच सीधे संपर्क के मौके बेहद सीमित रहे हैं। इस बातचीत में केवल अमेरिकी प्रतिनिधि ही शामिल नहीं थे, बल्कि मिस्र, कतर और तुर्किये के अधिकारी भी मौजूद रहे। इन देशों की भूमिका पहले भी गाजा से जुड़े युद्धविराम और बंधक वार्ताओं में महत्वपूर्ण रही है।
बैठक का मुख्य उद्देश्य संघर्ष को रोकने के लिए संभावित रास्ते तलाशना और अमेरिका की 15 सूत्री योजना पर हमास की स्थिति को समझना बताया जा रहा है। हमास की ओर से योजना के अलग-अलग प्रस्तावों को लेकर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह आगे की बातचीत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
वहीं जेरेड कुशनर सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात करने वाले हैं। इस बैठक में गाजा में युद्धविराम, इजराइली सेना की संभावित वापसी और आगे की सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। कुशनर का दोनों पक्षों के साथ बातचीत करना अमेरिका की ओर से मध्यस्थता के प्रयास को दर्शाता है।
अमेरिका की कोशिश है कि इजराइल और हमास के बीच किसी ऐसे समझौते तक पहुंचा जाए, जिससे गाजा में जारी हिंसा को रोका जा सके। हालांकि दोनों पक्षों की मांगों और शर्तों में काफी अंतर है। हमास की ओर से गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई को खत्म करने और क्षेत्र में फिलिस्तीनियों की स्थिति को लेकर मांगें उठती रही हैं, जबकि इजराइल अपनी सुरक्षा और हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करने को प्रमुख मुद्दा मानता रहा है।
ऐसे में 15 सूत्री योजना को लागू कराना आसान नहीं होगा। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि हमास हथियार छोड़ने के प्रस्ताव को किस रूप में स्वीकार करता है और इजराइल गाजा से सैन्य वापसी को लेकर किस तरह की शर्तें रखता है। दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी भी शांति वार्ता के रास्ते में बड़ी बाधा मानी जा रही है।
मिस्र और कतर की मौजूदगी भी इस पूरी बातचीत में अहम है। दोनों देश पहले भी इजराइल और हमास के बीच मध्यस्थता में भूमिका निभा चुके हैं। तुर्किये भी इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय रहा है। ऐसे में इन देशों के प्रतिनिधियों का बैठक में शामिल होना इस बात का संकेत है कि बातचीत को व्यापक क्षेत्रीय समर्थन देने की कोशिश की जा रही है।
जेरेड कुशनर की भूमिका भी इस प्रक्रिया में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। वह पहले भी मध्य पूर्व से जुड़े मामलों में अमेरिकी प्रशासन के साथ काम कर चुके हैं। अब उनके सामने चुनौती यह है कि इजराइल और हमास के बीच ऐसी सहमति तैयार की जाए जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर कुशनर की नेतन्याहू के साथ होने वाली मुलाकात पर है। हमास नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद इजराइली प्रधानमंत्री से चर्चा में अमेरिका किस तरह की रणनीति पेश करता है और इजराइल की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इससे आगे की शांति प्रक्रिया की दिशा तय हो सकती है।
अगर इन बातचीत से कोई ठोस सहमति बनती है तो गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष को रोकने की दिशा में यह एक बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन अभी इसे अंतिम समझौता मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में हमास, इजराइल और अमेरिका की ओर से सामने आने वाले बयानों से साफ होगा कि 15 सूत्री शांति योजना वास्तव में युद्धविराम की राह खोल पाती है या फिर बातचीत एक बार फिर मुश्किलों में फंस जाती है।


