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Manipur में KCP के 46 militants ने किया surrender, CM वाई खेमचंद सिंह ने दिया पुनर्वास का भरोसा

मणिपुर में उग्रवाद के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रतिबंधित संगठन कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी यानी KCP ताइबांगनबा के 46 सदस्यों ने सुरक्षा बलों और पुलिस के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया है। इंफाल स्थित फर्स्ट मणिपुर राइफल्स के परेड मैदान में आयोजित ‘घर वापसी समारोह’ के दौरान इन सदस्यों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

समारोह में मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पण करने वाले सदस्यों का स्वागत करते हुए उन्हें सरकार की तरफ से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि हिंसा और हथियारों के रास्ते से राज्य का विकास संभव नहीं है। विकास के लिए शांति और सुरक्षा का माहौल जरूरी है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, KCP ताइबांगनबा के इन 46 सदस्यों ने संशोधित आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति 2018 के तहत हथियार छोड़े हैं। सरकार की ओर से उन्हें दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने में मदद दी जाएगी। इसके लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और आजीविका से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

‘घर वापसी समारोह’ के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में जारी संघर्ष के कारण कई लोगों ने हथियार उठा लिए थे। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि अब उन्हें समझ में आ गया है कि हथियारों के जरिए प्रगतिशील विकास हासिल नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री का संदेश साफ था कि सरकार चाहती है कि हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोग समाज की मुख्यधारा में वापस आएं और सामान्य जीवन बिताएं।

मुख्यमंत्री ने शांति और सुरक्षा को राज्य के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य तभी आगे बढ़ सकता है जब वहां कानून-व्यवस्था मजबूत हो और लोग सुरक्षित माहौल में अपना जीवन जी सकें। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण माहौल तभी तैयार किया जा सकता है जब लोग हथियार उठाने की इच्छा छोड़ें और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते हुए आगे बढ़ें।

इस दौरान मणिपुर में पिछले कुछ वर्षों से जारी जातीय हिंसा का संदर्भ भी सामने आया। 3 मई 2023 को राज्य में मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा भड़की थी। इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसे माहौल में किसी प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों का हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटना सरकार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

कार्यक्रम में मणिपुर के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने भी आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने हथियारबंद गतिविधियों को छोड़कर अपने परिवार और समुदाय के बीच लौटने का रास्ता चुना है। अब उनके सामने एक नागरिक के तौर पर समाज में अपनी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर है।

डीजीपी ने कहा कि मणिपुर पुलिस अपने संवैधानिक दायित्वों का मजबूती से पालन करती रहेगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग वास्तव में हिंसा छोड़कर समाज में वापस लौटना चाहते हैं, पुलिस उनकी आत्मसमर्पण, सत्यापन और पुनर्वास से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया में मदद करेगी।

पुलिस महानिदेशक ने आत्मसमर्पण करने वाले लोगों से अपने फैसले पर पूरी तरह कायम रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि घर वापसी की सफलता का आकलन सिर्फ आज आयोजित समारोह से नहीं किया जाएगा, बल्कि आने वाले समय में उनके व्यवहार और समाज में उनके योगदान से होगा।

मणिपुर में हाल के समय में अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों के सदस्यों की ओर से आत्मसमर्पण की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले महीने भी KCP पीपल्स वॉर ग्रुप से जुड़े 46 उग्रवादियों के सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण करने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे घटनाक्रम राज्य में हिंसा कम करने और हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य हथियार छोड़ने वाले लोगों को दोबारा समाज में स्थापित करने में मदद करना है। कौशल विकास और आजीविका से जुड़े अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में सहायता देने की कोशिश की जा रही है। इससे आत्मसमर्पण करने वाले लोगों के लिए हिंसा छोड़कर वैकल्पिक जीवन चुनने का रास्ता आसान हो सकता है।

फिलहाल KCP ताइबांगनबा के 46 सदस्यों का आत्मसमर्पण मणिपुर में शांति प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब असली चुनौती यह होगी कि आत्मसमर्पण करने वाले लोग पुनर्वास प्रक्रिया का हिस्सा बनकर कितनी सफलतापूर्वक सामान्य जीवन में लौटते हैं। सरकार और पुलिस दोनों ने उन्हें सहयोग का भरोसा दिया है और आने वाले समय में उनके पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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