अगर आपको तीखा खाना पसंद है तो आपके लिए एक दिलचस्प खबर है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में मसालेदार खाना और कम मृत्यु जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। एक बड़े अध्ययन में ऐसे लोगों में कुल मृत्यु का जोखिम 14% कम पाया गया, जो सप्ताह में 6 से 7 दिन मसालेदार खाना खाते थे, उनकी तुलना में जो सप्ताह में एक बार से भी कम मसालेदार खाना खाते थे। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मिर्च खाने से सीधे उम्र बढ़ती है, क्योंकि ये अध्ययन मुख्य रूप से संबंध दिखाते हैं, कारण साबित नहीं करते।
भारत में मिर्च और मसालेदार भोजन रोजमर्रा के खान-पान का हिस्सा हैं। सब्जी, दाल, चटनी से लेकर कई तरह के स्नैक्स में मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है। मिर्च का तीखापन मुख्य रूप से कैप्साइसिन नामक यौगिक की वजह से होता है। वैज्ञानिकों ने कैप्साइसिन और शरीर में इसके संभावित प्रभावों को लेकर कई अध्ययन किए हैं।
एक बड़े आबादी आधारित अध्ययन में करीब 4.87 लाख लोगों के खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें पाया गया कि सप्ताह में 6 या 7 दिन मसालेदार खाना खाने वाले लोगों में सप्ताह में एक बार से कम मसालेदार भोजन करने वालों की तुलना में कुल मृत्यु का जोखिम करीब 14% कम था। अध्ययन में कैंसर, हृदय और सांस से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मृत्यु के साथ भी संबंध देखा गया था।
इसके बाद हुए कुछ मेटा-विश्लेषणों में भी मिर्च या मसालेदार भोजन खाने और कम मृत्यु जोखिम के बीच संबंध सामने आया। कुछ समीक्षाओं में नियमित मिर्च खाने वालों में सभी कारणों से होने वाली मृत्यु का जोखिम कम पाया गया। हालांकि वैज्ञानिक अभी यह नहीं कहते कि मिर्च खाना लंबी उम्र की गारंटी है।
मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन को लेकर वैज्ञानिकों की खास दिलचस्पी रही है। यह शरीर में कुछ रिसेप्टर्स पर असर डालता है और इसके संभावित एंटी-इंफ्लेमेटरी तथा मेटाबॉलिक प्रभावों पर शोध हुआ है। हालांकि इन संभावित फायदों को लेकर अभी यह कहना सही नहीं होगा कि मिर्च किसी बीमारी को रोकती है या जीवनकाल निश्चित रूप से बढ़ाती है।
मिर्च का एक संभावित फायदा हृदय स्वास्थ्य से भी जोड़ा गया है। कुछ अध्ययनों में नियमित मिर्च का सेवन करने वालों में हृदय संबंधी मृत्यु का जोखिम कम पाया गया है। लेकिन इन अध्ययनों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि सिर्फ मिर्च खाने से हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है।
कुछ शोधों में कैंसर से होने वाली मृत्यु के जोखिम में भी कमी का संबंध देखा गया है। लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि मिर्च खाने से कैंसर से बचाव की गारंटी मिलती है। खान-पान के अलावा उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, शराब और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी आदतें भी स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि वैज्ञानिक अभी यह तय नहीं कर पाए हैं कि कितनी मात्रा में मिर्च खाना स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर है। अलग-अलग अध्ययनों में मिर्च की मात्रा और सेवन की आवृत्ति अलग रही है। इसलिए सिर्फ ज्यादा मिर्च खाने को स्वास्थ्य का फॉर्मूला मानना सही नहीं होगा।
अगर आपको मिर्च पसंद है तो सामान्य मात्रा में इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। लेकिन सिर्फ लंबी उम्र के लिए बहुत ज्यादा तीखा खाना शुरू करना सही तरीका नहीं है। अत्यधिक मसालेदार भोजन कुछ लोगों में पेट में जलन, एसिडिटी, अपच या दूसरी पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है। इसलिए अपनी सहनशीलता के अनुसार ही मसालेदार भोजन लेना बेहतर है।
कुल मिलाकर, अब तक की रिसर्च मिर्च और मसालेदार भोजन को लेकर एक दिलचस्प संकेत जरूर देती है। कुछ बड़े अध्ययनों में नियमित मसालेदार भोजन करने वालों में मृत्यु जोखिम कम पाया गया है, लेकिन इसे मिर्च खाने और लंबी उम्र के बीच पक्का कारण-परिणाम संबंध नहीं माना जा सकता।
स्वस्थ जीवन के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता देना ज्यादा जरूरी है। मिर्च आपके खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ संभावित स्वास्थ्य लाभ दे सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज या लंबी उम्र की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।


