Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

सबूत ‘बहुत कमजोर’, बरी हो सकता है दोषी? दाभोलकर मर्डर केस में बॉम्बे HC का बड़ा बयान

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी ठहराए गए सचिन अंदुरे को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत मंजूर कर दी। कोर्ट ने मामले में उनके खिलाफ मौजूद सबूतों को बेहद कमजोर बताया और कहा कि अपील की सुनवाई के दौरान आखिरकार उनके बरी होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। यह फैसला 2013 में हुई दाभोलकर की हत्या से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामले में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

नरेंद्र दाभोलकर सामाजिक कार्यकर्ता और अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। 20 अगस्त 2013 को पुणे में मॉर्निंग वॉक के दौरान गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की जांच लंबे समय तक चली और बाद में मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपा गया। इस मामले में सचिन अंदुरे और शरद कलासकर को आरोपी बनाया गया था।

मई 2024 में पुणे की विशेष अदालत ने सचिन अंदुरे और शरद कलासकर को दाभोलकर की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषियों ने अपनी सजा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। अब हाईकोर्ट ने सचिन अंदुरे की अपील पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ पेश किए गए सबूतों की मजबूती पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अदालत ने खास तौर पर दो चश्मदीद गवाहों की पहचान को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट के मुताबिक, इन दोनों गवाहों ने घटना के करीब आठ साल बाद पहली बार सचिन अंदुरे की पहचान की थी। हाईकोर्ट ने माना कि किसी आरोपी की पहचान के लिए आठ साल का अंतराल काफी लंबा समय है। इतने लंबे समय बाद की गई पहचान को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं और इसी वजह से कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के इस सबूत को कमजोर माना।

मामले में सिर्फ चश्मदीद गवाहों की पहचान ही सवालों के घेरे में नहीं आई है। अदालत ने कथित तौर पर हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं। इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सचिन अंदुरे के खिलाफ मौजूद सबूत फिलहाल काफी कमजोर दिखाई देते हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सचिन अंदुरे को अंतिम रूप से बरी कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने फिलहाल उनकी उम्रकैद की सजा को निलंबित किया है और उन्हें जमानत दी है। उनकी अपील पर आगे सुनवाई जारी रहेगी। अंतिम फैसला आने के बाद ही यह तय होगा कि निचली अदालत का दोषसिद्धि का फैसला बरकरार रहता है या उसमें बदलाव होता है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नरेंद्र दाभोलकर की हत्या ने पूरे महाराष्ट्र में बड़ी प्रतिक्रिया पैदा की थी। अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले दाभोलकर की हत्या के बाद जांच एजेंसियों पर आरोपियों और कथित साजिश की पूरी कड़ी सामने लाने का दबाव रहा। मामले में कई वर्षों तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चलती रही।

हाईकोर्ट के ताजा आदेश से अब इस मामले में अभियोजन पक्ष के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अदालत ने जिन सबूतों को कमजोर माना है, उन्हें अपील की आगे की सुनवाई में फिर से परखा जाएगा। खासतौर पर चश्मदीद गवाहों की पहचान, हथियार से जुड़े साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों की अहमियत पर चर्चा हो सकती है।

इस पूरे मामले में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जमानत मिलना या सजा पर रोक लगना आरोपी के अंतिम रूप से निर्दोष साबित होने के बराबर नहीं है। सचिन अंदुरे को निचली अदालत ने दोषी ठहराया था और अब हाईकोर्ट में उस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है। अंतिम कानूनी स्थिति हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला दाभोलकर हत्याकांड की कानूनी लड़ाई में एक बड़ा मोड़ है। अदालत द्वारा सबूतों को ‘बहुत कमजोर’ बताए जाने और आठ साल बाद हुई पहचान पर सवाल उठाए जाने से अब मामले की आगे की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि अभियोजन पक्ष इन कमियों को किस तरह स्पष्ट करता है और हाईकोर्ट अंततः सचिन अंदुरे की दोषसिद्धि को बरकरार रखता है या उन्हें बरी कर देता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles