आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, स्क्रीन टाइम, सामाजिक दूरी और लगातार बदलती दिनचर्या की वजह से तनाव और मानसिक थकान आम समस्या बनती जा रही है। ऐसे में लोग सिर्फ दवाओं या क्लिनिकल ट्रीटमेंट के अलावा ऐसे तरीकों की भी तलाश कर रहे हैं, जो उन्हें मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकें। इन्हीं तरीकों में इन दिनों ‘Blue Space’ का जिक्र तेजी से हो रहा है। Blue Space का मतलब पानी से जुड़े प्राकृतिक या खुले स्थानों से है, जैसे समुद्र, झील, नदी या तालाब के आसपास का वातावरण। हालांकि इसे डिप्रेशन का इलाज या दवाओं का विकल्प मानना सही नहीं होगा।
Blue Space Therapy को आसान भाषा में समझें तो इसका आधार पानी के आसपास समय बिताने और उस वातावरण से मिलने वाले मानसिक आराम से जुड़ा है। जब कोई व्यक्ति समुद्र किनारे बैठता है, झील के पास टहलता है या नदी के किनारे कुछ समय शांत वातावरण में बिताता है, तो उसे रोजमर्रा के शोर और भागदौड़ से कुछ दूरी मिल सकती है। प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने के दौरान व्यक्ति शारीरिक गतिविधि, माइंडफुलनेस और सामाजिक जुड़ाव जैसी चीजों में भी शामिल हो सकता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
Blue Space और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर कई शोध किए जा रहे हैं। कुछ अध्ययनों में पानी के आसपास समय बिताने और मानसिक wellbeing के बीच सकारात्मक संबंध के संकेत मिले हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में Blue Space का प्रभाव एक जैसा होगा या इससे Depression अपने आप ठीक हो जाएगा। रिसर्च अभी इस बात को समझने की कोशिश कर रही है कि पानी के आसपास का कौन-सा वातावरण और कितनी देर तक उसका संपर्क मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
अगर आप समुद्र किनारे बैठकर खुद को ज्यादा शांत महसूस करते हैं, तो इसके पीछे सिर्फ पानी का दृश्य ही नहीं बल्कि पूरा वातावरण काम कर सकता है। खुली जगह, प्राकृतिक आवाजें, हवा, कम शोर, हल्की शारीरिक गतिविधि और रोजमर्रा की स्क्रीन से दूरी मिलकर व्यक्ति को मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस करा सकती हैं। इसी वजह से प्रकृति के बीच समय बिताने को मानसिक wellbeing के लिए उपयोगी lifestyle activity माना जाता है।
Blue Space को एक complementary wellness approach के रूप में देखा जाना ज्यादा उचित है। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति झील या समुद्र के किनारे कुछ समय शांत बैठ सकता है, धीरे-धीरे टहल सकता है, सांसों पर ध्यान दे सकता है या प्रकृति को ध्यान से देख सकता है। इससे उसे मानसिक ब्रेक मिल सकता है और रोजमर्रा के तनाव से कुछ समय के लिए दूरी बनाने में मदद मिल सकती है।
अब बात पानी के अंदर होने वाली गतिविधियों की भी। कुछ जगहों पर स्कूबा डाइविंग, फ्री-डाइविंग, ब्रीदवर्क और मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को wellbeing से जोड़ा जाता है। पानी के अंदर होने का अनुभव कुछ लोगों को बेहद शांत और अलग महसूस करा सकता है। लेकिन ऐसी गतिविधियों को Depression या Trauma का प्रमाणित इलाज कहना सही नहीं होगा। खासकर स्कूबा डाइविंग और फ्री-डाइविंग जैसी गतिविधियों के लिए उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
अगर किसी व्यक्ति को लगातार उदासी, निराशा, अत्यधिक चिंता, नींद में गंभीर बदलाव, काम में रुचि खत्म होना या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने जैसी समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो केवल Blue Space या किसी दूसरे wellness activity पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर या मनोचिकित्सक दवा, थेरेपी या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।
Blue Space का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में एक healthy activity के रूप में किया जा सकता है। अगर आपके आसपास झील, नदी, समुद्र या कोई सुरक्षित जल क्षेत्र है, तो वहां कुछ समय प्रकृति के बीच बिताना, पैदल चलना और फोन से थोड़ी दूरी बनाना मानसिक आराम के लिए अच्छा अनुभव हो सकता है। लेकिन पानी के पास जाते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर Blue Space Therapy को लेकर रिसर्च जरूर बढ़ रही है और पानी के आसपास रहने तथा मानसिक wellbeing के बीच संभावित सकारात्मक संबंध के संकेत भी मिले हैं। लेकिन अभी इसे Depression या Anxiety का इलाज कहने के लिए पर्याप्त मजबूत प्रमाण मौजूद नहीं हैं। इसे मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल में एक सहायक lifestyle approach के तौर पर देखा जा सकता है, जबकि गंभीर या लगातार मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेषज्ञ की सलाह और प्रमाणित उपचार को प्राथमिकता देनी चाहिए।


