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मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई महाराष्ट्र की सियासत! मनोज जरांगे ने मुंबई में प्रदर्शन का किया ऐलान

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा रहा है। मराठा समुदाय के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल अपनी मांगों को लेकर जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके अनशन का सोमवार को तीसरा दिन है और अब उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने पर मुंबई में बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांग है कि मराठा समुदाय को कुणबी प्रमाण पत्र दिए जाएं। इसके जरिए मराठा समुदाय के लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। इसी मांग को लेकर जरांगे लगातार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

जरांगे का कहना है कि मराठा समाज की मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है, लेकिन अभी तक उनकी मांगों का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है। इसी वजह से उन्होंने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

अंतरवाली सराटी में जरांगे की भूख हड़ताल शुरू होते ही उनके समर्थकों की भीड़ जुटने लगी है। मराठा आरक्षण के मुद्दे पर पहले भी महाराष्ट्र में बड़े आंदोलन हो चुके हैं और अब नए सिरे से आंदोलन शुरू होने से सरकार की चिंता बढ़ सकती है।

जरांगे पाटिल ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया तो 12 सितंबर से मुंबई में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से भी आंदोलन के लिए तैयार रहने की अपील की है।

मुंबई में प्रदर्शन का ऐलान महाराष्ट्र की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है। राजधानी मुंबई में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होने की स्थिति में सरकार और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

मराठा आरक्षण महाराष्ट्र की राजनीति का बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। समुदाय लंबे समय से शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग करता रहा है। दूसरी तरफ OBC समुदाय के आरक्षण अधिकारों और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी अलग-अलग पक्षों की चिंताएं सामने आती रही हैं।

कुणबी प्रमाण पत्र की मांग इसी विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जरांगे पाटिल का तर्क है कि पात्र मराठा लोगों को कुणबी प्रमाण पत्र मिलने से वे OBC आरक्षण के दायरे में आ सकते हैं। सरकार के सामने चुनौती यह है कि मराठा समुदाय की मांगों और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों के हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

इस बीच जरांगे की भूख हड़ताल के तीसरे दिन आंदोलन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज होने लगी हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

अगर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकलता है, तो 12 सितंबर से मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। इससे राज्य में राजनीतिक दलों पर भी अपना रुख स्पष्ट करने का दबाव बढ़ेगा।

फिलहाल मनोज जरांगे पाटिल अंतरवाली सराटी में अनशन पर हैं और मराठा आरक्षण की मांग को लेकर सरकार से फैसले की उम्मीद कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार उनकी मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या मुंबई में प्रस्तावित बड़े आंदोलन की नौबत आती है।

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