प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा अब पूरी हो गई है। 29 अगस्त से 1 सितंबर तक चली इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई अहम कूटनीतिक बैठकों में हिस्सा लिया और क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा तथा आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखा। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO का 26वां शिखर सम्मेलन रहा। बिश्केक में आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का पुराना और स्पष्ट रुख दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के बीच संवाद का रास्ता ही आगे बढ़ने का सबसे बेहतर माध्यम है। भारत लगातार कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है और प्रधानमंत्री के भाषण में भी यही संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख को भी दोहराया। उन्होंने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताता रहा है। SCO जैसे मंच पर प्रधानमंत्री का यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि संगठन के सदस्य देशों के सामने क्षेत्रीय सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। बदलते वैश्विक हालात में देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना, आर्थिक संबंधों को बढ़ाना और सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करना बेहद जरूरी माना जा रहा है। भारत की ओर से SCO के मंच पर इसी व्यापक सहयोग की तस्वीर पेश की गई।
चार दिन की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने केवल बहुपक्षीय सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया, बल्कि विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की। इन मुलाकातों में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ आपसी सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा हुई। भारत की विदेश नीति के लिहाज से ऐसी बैठकें रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यह संगठन यूरेशियाई क्षेत्र में सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रमुख मंच के रूप में देखा जाता है। भारत इस मंच के जरिए आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयास, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को लेकर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत ने यह संदेश भी दिया कि तेजी से बदलती दुनिया में रणनीतिक संतुलन के साथ-साथ संवाद और सहयोग बेहद जरूरी हैं। एक तरफ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, तो दूसरी तरफ व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में देशों की परस्पर निर्भरता बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत खुद को एक जिम्मेदार और सक्रिय वैश्विक भागीदार के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है।
प्रधानमंत्री की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने कड़े रुख को दोहराते हुए बातचीत और कूटनीति को विवादों के समाधान का रास्ता बताया। यानी भारत की रणनीति में सुरक्षा के मुद्दों पर सख्ती और विवादों को सुलझाने के लिए संवाद—दोनों पहलुओं को साथ रखा गया।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिश्केक से नई दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। उनकी इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और SCO में उसकी सक्रिय भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चार दिनों के दौरान प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण सामने रखा और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ संपर्क बढ़ाया।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा कई अहम संदेशों के साथ संपन्न हुई। SCO शिखर सम्मेलन में भारत ने बातचीत और कूटनीति को विवादों के समाधान का रास्ता बताते हुए आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया। अब प्रधानमंत्री दिल्ली लौट रहे हैं और इस यात्रा के दौरान हुई बैठकों और चर्चाओं के परिणाम आने वाले समय में भारत के क्षेत्रीय और रणनीतिक संबंधों में दिखाई दे सकते हैं।


