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Paper Leak Protest पर Supreme Court का बड़ा फैसला! छात्रों पर दर्ज FIR रद्द, Article 142 से मिली बड़ी राहत

देशभर में कथित पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इन प्रदर्शनों के सिलसिले में छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी है। इस फैसले का असर दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज उन मामलों पर पड़ेगा, जो कथित पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को प्रदर्शन में शामिल छात्रों के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। पेपर लीक के आरोपों के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों और युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। अब अदालत के आदेश के बाद संबंधित मामलों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है।

यह फैसला चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को ऐसे आदेश जारी करने की शक्ति देता है, जो किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए जरूरी हों। इसी विशेष संवैधानिक शक्ति के तहत अदालत ने विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को राहत प्रदान की है।

बताया गया है कि अदालत के आदेश में दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर को शामिल किया गया है। यानी इन राज्यों में पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले उन छात्रों को राहत मिल सकती है, जिनके खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के कारण आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।

पेपर लीक का मुद्दा पिछले कुछ समय से छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच बेहद संवेदनशील रहा है। परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर छात्र लगातार सवाल उठाते रहे हैं। कथित पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ता है, जो लंबे समय तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन छात्रों को राहत मिली है, जिन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि अदालत ने इस राहत को बिना किसी सीमा के लागू नहीं किया है। आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों को इस आदेश के दायरे से बाहर रखा गया है। यानी इन लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।

यह अपवाद अदालत के फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे साफ होता है कि सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों को राहत देते हुए उन लोगों को अलग रखा है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड बताया गया है। ऐसे लोगों के मामलों पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब उन राज्यों में भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जहां पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान एफआईआर दर्ज की गई थीं। संबंधित पुलिस और प्रशासन को अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। जिन मामलों को इस फैसले के तहत राहत मिली है, उनमें प्रदर्शनकारियों को अब एफआईआर के कारण होने वाली कानूनी परेशानियों से राहत मिल सकती है।

इस फैसले का एक बड़ा पहलू यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन और आपराधिक मामलों के बीच अंतर को ध्यान में रखा है। अदालत ने अपनी संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए ऐसे प्रदर्शनकारियों को राहत दी है, जिनके खिलाफ मामले कथित पेपर लीक के विरोध से जुड़े थे। हालांकि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को इससे अलग रखा गया है।

अब छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा होना तय है। पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, सरकार और प्रशासन के लिए भी यह संदेश है कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई करते समय परिस्थितियों और प्रदर्शनकारियों की भूमिका को ध्यान में रखना जरूरी है।

कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फैसले ने कथित पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को बड़ी राहत दी है। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज संबंधित एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। हालांकि 2,873 आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को इस राहत से बाहर रखा गया है। अब इस फैसले का असर उन हजारों छात्रों पर पड़ सकता है, जो पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के बाद कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे थे।

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