दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट से अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को बड़ी कानूनी राहत मिली है। म्यांमार के विद्रोही समूहों को हथियारों और ड्रोन का प्रशिक्षण देने के आरोपों से जुड़े एनआईए मामले में अदालत ने उन्हें डिफॉल्ट जमानत दे दी है। लेकिन इस जमानत के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं। आखिर अदालत ने किस आधार पर यह राहत दी और अब मैथ्यू वैनडाइक को किन नियमों का पालन करना होगा? आइए जानते हैं पूरी खबर।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने म्यांमार के सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर प्रशिक्षण देने के मामले में गिरफ्तार किया था। वह इस मामले में गिरफ्तार किए गए सात विदेशी नागरिकों में शामिल हैं। इनमें छह यूक्रेनी नागरिक भी बताए गए हैं।
शुक्रवार को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट स्थित एनआईए अदालत ने वैनडाइक की जमानत याचिका पर राहत देते हुए उन्हें डिफॉल्ट जमानत प्रदान की। अदालत ने यह आदेश जांच एजेंसी द्वारा निर्धारित कानूनी समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने के आधार पर दिया।
दरअसल, डिफॉल्ट जमानत एक कानूनी प्रावधान है। जब किसी मामले में जांच एजेंसी निर्धारित समय के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाती और आरोपी कानूनी शर्तों के अनुसार जमानत की मांग करता है, तो उसे इस आधार पर राहत मिल सकती है। यह जमानत आरोपों से बरी होने के समान नहीं होती, बल्कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान मिलने वाली राहत है।
अदालत ने मैथ्यू वैनडाइक को एक लाख रुपये के बॉन्ड और एक लाख रुपये की जमानत राशि पर राहत दी है। हालांकि, उनकी रिहाई के साथ अदालत ने कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। आदेश के मुताबिक, रिहाई के बाद उन्हें दिल्ली में ही रहना होगा। इसके अलावा, जब भी एनआईए उन्हें जांच या पूछताछ के लिए बुलाएगी, उन्हें उपस्थित होना होगा।
इस मामले में वैनडाइक की ओर से दलील दी गई थी कि जांच कानूनी तौर पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी नहीं की गई। इसी आधार पर उन्होंने डिफॉल्ट जमानत की मांग की थी। अदालत ने उनकी दलील पर विचार करते हुए यह राहत प्रदान की।
इस घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। अदालत ने संकेत दिया कि इसी मामले में गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिक भी समान कानूनी आधार पर जमानत की मांग कर सकते हैं। हालांकि, उनके संबंध में आगे क्या आदेश होगा, यह संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
गौरतलब है कि मैथ्यू वैनडाइक पर म्यांमार के विद्रोही समूहों को हथियारों और ड्रोन से संबंधित प्रशिक्षण देने के आरोप हैं। ये आरोप जांच का विषय हैं और जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों को सही या गलत ठहरा दिया है।
फिलहाल, राउज़ एवेन्यू कोर्ट के आदेश के बाद मैथ्यू वैनडाइक को इस एनआईए मामले में डिफॉल्ट जमानत मिल गई है। उन्हें दिल्ली में रहकर जांच में सहयोग करना होगा और एनआईए के बुलाने पर पूछताछ के लिए पेश होना होगा। वहीं, इस मामले में गिरफ्तार अन्य विदेशी नागरिकों की कानूनी स्थिति पर भी आगे नजर बनी रहेगी।


