अमेरिका की धमकियों के बीच ईरान के कथित ‘कोड 100’ अलर्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवर, तो दूसरी तरफ ईरान की सैन्य तैयारियों को लेकर सामने आ रहे दावे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मध्य पूर्व में एक और बड़े सैन्य टकराव की जमीन तैयार हो रही है?
पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान की सैन्य तैयारियों को लेकर आई खबरों में दावा किया जा रहा है कि देश ने ‘कोड 100’ नाम का उच्चस्तरीय अलर्ट सक्रिय किया है। बताया जा रहा है कि इस कथित आदेश के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी, नियमित सेना और सुरक्षा बलों को अधिकतम सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस अलर्ट की आधिकारिक पुष्टि ईरान के सरकारी मीडिया की ओर से नहीं हुई है।
‘कोड 100’ को लेकर सामने आ रहे दावों ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई है, क्योंकि इसी दौरान सऊदी अरब और यमन के हूती बलों के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। हूती बलों ने रियाद और अन्य संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने का दावा किया है। वहीं, सऊदी अरब की ओर से आने वाले खतरों को रोकने के प्रयासों की खबरें भी सामने आई हैं। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कैंप डेविड से निर्धारित समय से पहले व्हाइट हाउस लौटने की खबर भी चर्चा में है। उनकी वापसी के पीछे का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। हालांकि, ईरान के कथित सैन्य अलर्ट और ट्रंप की अचानक वापसी के समय को जोड़कर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह कहा जा सके कि ट्रंप की वापसी सीधे तौर पर ईरान के ‘कोड 100’ से जुड़ी हुई थी।
अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व में सुरक्षा संबंधी चेतावनियां भी जारी की गई हैं। अमेरिकी नागरिकों को क्षेत्र में सतर्क रहने और संभावित उड़ान रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने तथा यात्रा में व्यवधान जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब क्षेत्र में कई मोर्चों पर तनाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं।
ईरान की सैन्य तैयारियों को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि सेना के विभिन्न हिस्सों को किसी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार रखा जा सकता है। हालांकि, इन दावों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि ईरान तत्काल किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। सैन्य सतर्कता बढ़ाने का अर्थ संभावित खतरे से बचाव की तैयारी भी हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में इजरायल की भूमिका और अमेरिका की अगली रणनीति पर भी नजरें टिकी हुई हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी यात्रा में बदलाव की खबरों ने भी चर्चाओं को हवा दी है। लेकिन इन घटनाओं के बीच किसी साझा सैन्य योजना या आसन्न हमले की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान के ‘कोड 100’ अलर्ट की स्थिति, उसके वास्तविक दायरे और संभावित परिणामों को लेकर आधिकारिक जानकारी सीमित है। ट्रंप की वापसी और क्षेत्रीय हमलों के बीच संबंध भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में मध्य पूर्व में तनाव जरूर बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन क्या यह तनाव बड़े युद्ध में बदलेगा, इसका जवाब आने वाले घटनाक्रम और संबंधित देशों के आधिकारिक फैसलों से ही सामने आएगा।


