समरकंद में खेले गए शतरंज ओलंपियाड में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष वर्ग में रजत और महिला वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। आखिरी दौर में दोनों भारतीय टीमों को कड़े मुकाबलों का सामना करना पड़ा, लेकिन निर्णायक मौकों पर खिलाड़ियों ने शानदार धैर्य और जुझारूपन दिखाया। पुरुष टीम के लिए अर्जुन एरिगैसी की अहम जीत और महिला टीम के लिए साविता श्री का लंबा जुझारू ड्रॉ पदक सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण रहा।
महिला वर्ग में भारत का मुकाबला जॉर्जिया से हुआ। मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए अच्छी रही, जब कोनेरू हम्पी ने महज 24 चालों में अपनी बाजी जीतकर टीम को बढ़त दिलाई। लेकिन इसके बाद दिव्या देशमुख को अपनी बाजी में हार का सामना करना पड़ा। वंतिका अग्रवाल का मुकाबला बराबरी पर खत्म हुआ, जिसके बाद चौथे बोर्ड पर साविता श्री की बाजी बेहद महत्वपूर्ण हो गई।
साविता श्री काले मोहरों से मेरी अरबिद्जे के खिलाफ खेल रही थीं। मुकाबले के दौरान जॉर्जियाई खिलाड़ी ने लगातार दबाव बनाने की कोशिश की। अरबिद्जे के मोहरे सक्रिय थे और साविता के राजा के सामने भी कई मुश्किल स्थिति बनीं। लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने धैर्य नहीं खोया और लगातार सटीक बचाव करती रहीं।
यह मुकाबला 83 चालों तक चला। लंबी बाजी में साविता ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपनी स्थिति संभाले रखी और अंत में मुकाबला ड्रॉ कराने में सफल रहीं। साविता के इस नतीजे के साथ भारत ने जॉर्जिया को 2-2 से बराबरी पर रोक दिया और महिला टीम ने 17 अंकों के साथ कांस्य पदक हासिल कर लिया।
अब बात पुरुष टीम की, जहां आखिरी दौर में भारत का सामना हंगरी से हुआ। इस मुकाबले में अर्जुन एरिगैसी भारत के लिए निर्णायक प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में रहे। अर्जुन ने अनुभवी खिलाड़ी पीटर लेको के खिलाफ लंबी बाजी खेली और आखिरकार जीत हासिल की।
मुकाबले के निर्णायक चरण में अर्जुन ने वजीर और ऊंट के जरिए लेको के राजा पर दबाव बनाया। इसके बाद उन्होंने हाथी का बलिदान देकर हमला और तेज कर दिया। स्थिति लगातार मुश्किल होती गई और अंततः पीटर लेको ने बाजी छोड़ दी। अर्जुन की जीत से भारत को महत्वपूर्ण अंक मिला।
हालांकि बाकी बाजियों में भारत को मिश्रित परिणाम मिले। आर प्रज्ञानानंद और निहाल सरीन की बाजियां ड्रॉ रहीं, जबकि डी गुकेश को ग्लेब दुडिन के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इसके चलते भारत और हंगरी का मुकाबला 2-2 से बराबरी पर समाप्त हुआ।
इस परिणाम के बाद भारत के कुल 18 अंक हो गए। जर्मनी के भी 18 अंक थे, लेकिन टाईब्रेक में भारत का स्कोर बेहतर रहा। भारत ने 405.5 का टाईब्रेक स्कोर दर्ज किया, जबकि जर्मनी का स्कोर 386.5 रहा। इसी आधार पर भारतीय पुरुष टीम ने रजत पदक हासिल किया।
उज्बेकिस्तान ने पुरुष वर्ग में 20 अंकों के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत 18 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि टाईब्रेक के आधार पर पदक तालिका में भारत ने जर्मनी को पीछे छोड़ा।
इस तरह समरकंद शतरंज ओलंपियाड का भारत के लिए समापन दो पदकों के साथ हुआ। पुरुष टीम ने रजत और महिला टीम ने कांस्य पदक जीता। खास बात यह रही कि दोनों टीमों के लिए आखिरी दौर बेहद महत्वपूर्ण था और निर्णायक क्षणों में भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच अपना प्रदर्शन कायम रखा।
भारत ने इस ओलंपियाड में अपने प्रदर्शन के साथ एक और उपलब्धि हासिल की और प्रतिष्ठित गैप्रींदाशविली कप भी अपने नाम किया। यह कप पुरुष और महिला दोनों वर्गों में किसी देश के संयुक्त प्रदर्शन के आधार पर दिया जाता है।
अर्जुन एरिगैसी की जीत और साविता श्री का 83 चालों तक चला जुझारू मुकाबला भारत के अभियान के यादगार क्षणों में शामिल रहा। एक तरफ पुरुष टीम ने रजत के साथ अपना अभियान पूरा किया, वहीं महिला टीम ने कांस्य पदक हासिल कर भारत की झोली में दो और अंतरराष्ट्रीय शतरंज पदक जोड़ दिए।


