करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद दिल्ली में बारापुला फेज-3 कॉरिडोर को आम लोगों के लिए खोला गया, लेकिन उद्घाटन के महज दो दिन बाद ही इस नए कॉरिडोर पर भारी ट्रैफिक जाम ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। जिस रास्ते से मयूर विहार से आईएनए तक का सफर करीब 15 मिनट में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहां कई लोग दो घंटे से ज्यादा समय तक जाम में फंसे रहे।
बारापुला फेज-3 को दिल्ली के महत्वपूर्ण ट्रैफिक कॉरिडोर में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य पूर्वी दिल्ली की तरफ से आने वाले वाहनों को शहर के दूसरे हिस्सों तक तेज और आसान कनेक्टिविटी देना था। लेकिन कॉरिडोर खुलने के तुरंत बाद सामने आई ट्रैफिक समस्या ने इसके डिजाइन और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
भारी जाम के बाद अब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और लोक निर्माण विभाग यानी PWD पूरे बारापुला कॉरिडोर की समीक्षा करने में जुट गए हैं। अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की है कि आखिर नए हिस्से पर वाहनों का दबाव अचानक इतना क्यों बढ़ गया और किन जगहों पर ट्रैफिक की गति सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है।
इसके लिए ड्रोन सर्वे की मदद भी ली जा रही है। ड्रोन के जरिए पूरे कॉरिडोर में वाहनों की आवाजाही, लेन व्यवस्था और उन स्थानों की पहचान की जा रही है जहां गाड़ियां एक-दूसरे की लेन में मर्ज होती हैं। इन मर्जिंग पॉइंट्स को ट्रैफिक जाम की बड़ी वजहों में से एक माना जा रहा है।
दरअसल, किसी भी बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर पर ट्रैफिक का सुचारु संचालन सिर्फ सड़क की लंबाई या चौड़ाई पर निर्भर नहीं करता। वाहनों के प्रवेश और निकास के रास्ते, लेन बदलने की जगह, जंक्शन और आसपास की सड़कों से आने वाला ट्रैफिक भी पूरे सिस्टम के फ्लो को प्रभावित करता है। बारापुला फेज-3 में भी अब इन्हीं पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
PWD और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के बीच बैठक के बाद लेन व्यवस्था में संभावित बदलाव, मर्जिंग पॉइंट्स को बेहतर करने और ट्रैफिक फ्लो को नियंत्रित करने के विकल्पों पर चर्चा शुरू हुई है। जरूरत पड़ने पर कुछ स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन की संभावना भी देखी जा सकती है।
बारापुला फेज-3 के शुरू होने से पहले उम्मीद थी कि इससे दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों के बीच यात्रा का समय कम होगा और मौजूदा सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। लेकिन शुरुआत में ही सामने आई भारी भीड़ ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कॉरिडोर को खोलने से पहले ट्रैफिक फ्लो का पर्याप्त परीक्षण किया गया था।
हालांकि, शुरुआती दिनों में किसी नए कॉरिडोर पर ट्रैफिक पैटर्न बदलना भी सामान्य स्थिति हो सकती है। बड़ी संख्या में वाहन चालक नए रास्ते का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे कुछ समय के लिए अप्रत्याशित दबाव पैदा हो सकता है। ऐसे में अधिकारियों की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट होगा कि समस्या स्थायी डिजाइन की है या ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
फिलहाल दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और PWD की नजर उन प्रमुख स्थानों पर है जहां वाहन धीमे हो रहे हैं या एक-दूसरे की लेन में मर्ज होने के कारण लंबी कतार बन रही है। ड्रोन सर्वे और ग्राउंड स्तर पर ट्रैफिक की निगरानी के आधार पर आगे के बदलाव किए जा सकते हैं।
बारापुला फेज-3 से लोगों को तेज और बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद है, लेकिन शुरुआती जाम ने परियोजना के ट्रैफिक डिजाइन पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अधिकारियों की समीक्षा के बाद कितनी जल्दी इन समस्याओं का समाधान होता है और क्या बारापुला कॉरिडोर अपने मूल उद्देश्य के मुताबिक दिल्ली के ट्रैफिक को राहत दे पाता है।


