मुंबई की विशेष राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआईए अदालत में आईएसआईएस मॉड्यूल मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को असामान्य स्थिति पैदा हो गई। मामले में गिरफ्तार आरोपी ताबिस सिद्दीकी ने अदालत में पेश किए जाने के दौरान पीठासीन न्यायाधीश और उनके परिवार को कथित तौर पर धमकी दी। आरोपी ने न्यायपालिका और मौजूदा सरकार के प्रति भी असम्मान जताया। घटना के बाद अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी की अगली पेशियां अगले आदेश तक केवल वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कराई जाएंगी।
आरोपी को विशेष एनआईए न्यायाधीश अभय जोगलेकर के सामने पेश किया गया था। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, पेशी के दौरान सिद्दीकी ने अदालत का नाम पूछने के बाद कथित तौर पर दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। उसने कहा कि उसे मौजूदा सरकार के प्रति कोई सम्मान नहीं है। इसके बाद उसने न्यायपालिका के खिलाफ भी कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और अदालत के प्रति सम्मान नहीं होने की बात कही।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब आरोपी ने पीठासीन न्यायाधीश को कथित तौर पर धमकी दी। अदालत के अनुसार, आरोपी ने न्यायाधीश और उनके परिवार को देख लेने की बात कही। इस आचरण को अदालत ने बेहद निंदनीय बताया। इसके बाद न्यायाधीश ने आरोपी की भविष्य की पेशियों को लेकर विशेष व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
अदालत ने आदेश दिया कि अब आरोपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया जाए। यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी। अदालत ने इस फैसले के पीछे आरोपी के व्यवहार और न्यायालय की सुरक्षा तथा कार्यवाही को सुचारू बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखा।
सुनवाई के दौरान आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड का भी अदालत ने परीक्षण किया। अदालत के सामने सरकारी जे. जे. अस्पताल में किए गए मनोवैज्ञानिक परीक्षण की रिपोर्ट रखी गई। रिपोर्ट में वर्तमान समय में किसी बड़ी मानसिक बीमारी के मौजूद नहीं होने की बात दर्ज होने का उल्लेख अदालत के आदेश में किया गया।
इसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने आरोपी के मानसिक बीमारी से जुड़े दावे पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि आरोपी मुकदमे की कार्यवाही से बचने के लिए मानसिक समस्या होने का दिखावा कर रहा है। अदालत ने आरोपी के व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए आगे की सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था तय की।
ताबिस सिद्दीकी उन सात आरोपियों में शामिल है जिन्हें जुलाई 2023 में महाराष्ट्र में आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े मामले की जांच के दौरान एनआईए ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि मामले में गिरफ्तार लोगों के आईएसआईएस से सक्रिय संबंध थे और वे कथित तौर पर संगठन के भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे।
एनआईए के मुताबिक, आरोपियों के ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों समेत कई ऐसी सामग्री बरामद हुई थी, जिसे जांच एजेंसी ने मामले से संबंधित बताया। एजेंसी ने सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़ी सामग्री मिलने का भी दावा किया था। एनआईए का आरोप है कि जब्त सामग्री से आरोपियों के आईएसआईएस के साथ कथित सक्रिय संबंधों और संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के प्रयासों का पता चलता है।
यह मामला वर्ष 2023 में महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद सामने आया था। एनआईए ने मामले की जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ आतंकवादी संगठन से कथित संबंध तथा उसकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के आरोपों की जांच की। मामले की न्यायिक प्रक्रिया फिलहाल जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई के बाद ही होगा।
गुरुवार की सुनवाई के दौरान हुए घटनाक्रम ने अदालत में सुरक्षा और आरोपियों की पेशी से जुड़े सवाल भी सामने ला दिए हैं। न्यायाधीश और उनके परिवार को धमकी दिए जाने के आरोप के बाद व्यक्तिगत पेशी के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विकल्प अपनाया गया है। इससे अदालत की कार्यवाही जारी रखने के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी ध्यान में रखा जा सकेगा।
फिलहाल ताबिस सिद्दीकी की अगली पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। मामले में एनआईए की ओर से लगाए गए आरोपों और बरामद सामग्री से जुड़े दावों पर अदालत की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन हैं और मामले में अंतिम फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।


