दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 200 के पार पहुंचने के बाद प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्ती बढ़ा दी गई है। इसी के मद्देनजर दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप का पहला चरण लागू किया गया है। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में सवाल है कि आखिर ग्रैप-1 के तहत कौन-कौन से प्रतिबंध लागू किए गए हैं और किन लोगों को जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों को ग्रैप-1 के तहत निर्धारित उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को प्रदूषण की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना तथा प्रदूषण के स्रोतों पर समय रहते नियंत्रण करना है।
ग्रैप-1 लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां और खुले में खाने-पीने की दुकानें चलाने वालों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। निर्धारित निर्देशों के तहत तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसका मकसद ईंधन जलने से निकलने वाले धुएं को कम करना है। संबंधित प्रतिष्ठानों को निर्देशों का पालन करना होगा, अन्यथा निरीक्षण के दौरान नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा सकती है।
सड़कों से उड़ने वाली धूल भी वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। इसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से सड़कों की यांत्रिक सफाई कराई जा रही है। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन उपायों का उद्देश्य हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को कम करना है, ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सके।
निर्माण कार्यों पर भी प्रशासन की नजर है। निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए आवश्यक प्रबंध करना, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और मलबे को खुले में फैलने से रोकना महत्वपूर्ण है। यदि किसी निर्माण स्थल पर निर्धारित पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक, कई स्थलों का जायजा लेकर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, प्रत्येक मामले में जुर्माने की राशि उल्लंघन की प्रकृति और लागू नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए यह जरूरी है कि किसी भी कार्रवाई या जुर्माने की जानकारी के लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक आदेश को देखा जाए।
ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को वायु प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग चरणों में लागू किया जाता है। पहले चरण में प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है। यदि हवा की गुणवत्ता और खराब होती है, तो स्थिति के अनुसार अगले चरणों के अतिरिक्त उपाय भी लागू किए जा सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने का असर आम लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के कारण खांसी, सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण अधिक होने पर बाहर व्यायाम करने से बचना और स्थानीय वायु गुणवत्ता संबंधी सलाह का पालन करना उपयोगी हो सकता है।
फिलहाल प्रशासन का जोर प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और ग्रैप-1 के नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर है। लोगों से भी अपील है कि वे कचरा या पत्तियां खुले में न जलाएं, वाहनों का अनावश्यक इस्तेमाल कम करें और अपने आसपास प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें। अब देखना होगा कि इन उपायों से दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है और प्रशासन नियम तोड़ने वालों के खिलाफ आगे क्या कदम उठाता है।


