Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

राजकोट में 17 फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, कोई 10वीं तो कोई 12वीं पास; मरीजों की जान से कर रहे थे खिलवाड़

गुजरात के राजकोट से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले 17 कथित फर्जी डॉक्टरों को पकड़ा गया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई आरोपी केवल 10वीं, 11वीं और 12वीं तक पढ़े हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद ये मरीजों का इलाज कर रहे थे। कोई अपने क्लिनिक में मरीजों को दवाइयां दे रहा था, तो कोई इंजेक्शन लगाकर उनकी बीमारी का उपचार करने का दावा कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, राजकोट जिले में ग्रामीण स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी की टीम ने कार्रवाई करते हुए इन 17 आरोपियों को पकड़ा। जांच के दौरान सामने आया कि ये लोग आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र के बिना मरीजों का इलाज कर रहे थे। चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की कथित लापरवाही लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पकड़े गए लोगों में तीन आरोपी केवल 10वीं पास हैं, जबकि आठ ने 12वीं तक पढ़ाई की है। इसके अलावा, तीन आरोपी 11वीं तक पढ़े हुए हैं और तीन स्नातक हैं। यानी कुल 14 आरोपियों की पढ़ाई 10वीं, 11वीं या 12वीं तक ही सीमित है। हालांकि, केवल सामान्य शैक्षणिक डिग्री होना किसी व्यक्ति को मरीजों का इलाज करने का अधिकार नहीं देता। इसके लिए निर्धारित चिकित्सकीय योग्यता और संबंधित नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

बताया जा रहा है कि आरोपी अपने-अपने क्लिनिक चलाकर मरीजों को दवाइयां दे रहे थे। कुछ मामलों में इंजेक्शन लगाने जैसी चिकित्सकीय गतिविधियां भी की जा रही थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना जरूरी योग्यता के ये लोग लंबे समय से मरीजों का इलाज कैसे कर रहे थे और क्या इनके उपचार से किसी मरीज को नुकसान पहुंचा है? पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 3 लाख 5 हजार रुपये का सामान भी जब्त किया है। हालांकि, जब्त किए गए सामान का पूरा विवरण और सभी आरोपियों की कथित गतिविधियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों के पास चिकित्सा से संबंधित कोई वैध प्रमाण पत्र था या नहीं और वे किन परिस्थितियों में क्लिनिक चला रहे थे।

इस घटना ने एक बार फिर लोगों के सामने इलाज कराने से पहले डॉक्टर की योग्यता और पंजीकरण की जांच करने की जरूरत को उजागर किया है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में कई बार लोग कम खर्च या आसानी से उपलब्ध इलाज के कारण स्थानीय क्लिनिक का रुख करते हैं। लेकिन बिना उचित चिकित्सकीय योग्यता वाले व्यक्ति से इलाज कराना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। गलत दवा, अनुचित इंजेक्शन या बीमारी की गलत पहचान मरीज की हालत बिगाड़ सकती है।

फिलहाल, राजकोट पुलिस ने सभी 17 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ये कथित फर्जी डॉक्टर कितने समय से मरीजों का इलाज कर रहे थे और इनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और लोगों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles