भारतीय खेल जगत से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। हरियाणा की बेटी मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल में मनीषा ने अमेरिका की पहलवान एबिगेल एलिजाबेथ नेटे को 8-6 से हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इस जीत के साथ ही मनीषा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। मुकाबले में एक समय ऐसा भी आया, जब उनकी हार लगभग तय दिखाई दे रही थी, लेकिन मनीषा ने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए मुकाबले का पूरा रुख बदल दिया।
30 अक्टूबर को खेले गए 59 किलोग्राम भार वर्ग के इस फाइनल मुकाबले में मनीषा का सामना अमेरिका की मजबूत पहलवान एबिगेल एलिजाबेथ नेटे से हुआ। मुकाबले की शुरुआत भारतीय पहलवान के लिए चुनौतीपूर्ण रही। अमेरिकी पहलवान ने शुरुआती दौर में शानदार प्रदर्शन करते हुए अंक हासिल किए और मनीषा को दबाव में ला दिया। पहले दौर के बाद मनीषा 1-6 से पीछे चल रही थीं। इस स्थिति में मुकाबला जीतना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा था, लेकिन मनीषा ने अपने अनुभव, धैर्य और मजबूत इरादों का परिचय दिया।
दूसरे दौर में मनीषा ने आक्रामक रणनीति अपनाई। उन्होंने लगातार हमले किए और अमेरिकी पहलवान को संभलने का मौका नहीं दिया। धीरे-धीरे उन्होंने अंकों का अंतर कम किया और मुकाबले में वापसी कर ली। मनीषा के शानदार प्रदर्शन के सामने उनकी प्रतिद्वंद्वी दबाव में आ गईं। आखिरकार भारतीय पहलवान ने 8-6 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में दर्ज होने वाला एक यादगार क्षण बन गई।
मनीषा की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इससे पहले कोई भी भारतीय महिला पहलवान सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक नहीं जीत सकी थी। इससे पहले अंशु मलिक ने 2021 में 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया था। वह विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं। अब मनीषा ने उनसे एक कदम आगे बढ़कर भारत को विश्व चैंपियनशिप का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया है।
हरियाणा की मनीषा भानवाला के लिए यह सफलता एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं है। इसके पीछे वर्षों का अभ्यास, कठिन प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हासिल किया गया अनुभव शामिल है। वह इससे पहले भी अलग-अलग भार वर्गों में मुकाबले कर चुकी हैं। एशियाई खेलों में पदक हासिल करने में नाकाम रहने के बाद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में 59 किलोग्राम भार वर्ग में उतरने का फैसला किया। उनका यह निर्णय आखिरकार बेहद सफल साबित हुआ।
स्वर्ण पदक तक पहुंचने के सफर में मनीषा ने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराया। उन्होंने शुरुआती मुकाबले में कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को पराजित किया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की बोलोरतूया खुरेलखू को 6-0 से हराकर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। सेमीफाइनल में उन्होंने मेजबान कजाकिस्तान की अल्तिन शागायेवा को शानदार प्रदर्शन करते हुए चित किया और फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।
इस प्रतियोगिता में भारत की अन्य महिला पहलवानों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया। वहीं, मनीषा के स्वर्ण पदक ने भारतीय महिला कुश्ती के प्रदर्शन को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। हालांकि, 59 किलोग्राम भार वर्ग ओलंपिक की आधिकारिक श्रेणियों में शामिल नहीं है, लेकिन विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक अपने आप में बेहद प्रतिष्ठित उपलब्धि है।
भारतीय कुश्ती में इससे पहले पुरुष वर्ग में सुशील कुमार विश्व चैंपियन बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। उन्होंने 2010 में मास्को में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में 66 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था। अब मनीषा की ऐतिहासिक जीत ने भारतीय कुश्ती को एक नया गौरव दिया है।
मनीषा भानवाला की यह सफलता देश की उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर इतिहास रचा जा सकता है। अब पूरे देश की निगाहें भारतीय महिला कुश्ती के भविष्य पर टिकी हैं, क्योंकि मनीषा की इस जीत ने आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है।


