महज 14 साल की उम्र और सामने विश्व रैंकिंग में 287वें स्थान पर मौजूद अनुभवी खिलाड़ी, लेकिन भारतीय युवा टेनिस खिलाड़ी जेन्सी कनाबर ने हार मानने के बजाय ऐसा संघर्ष दिखाया कि हर कोई उनके प्रदर्शन की चर्चा करने लगा। चेन्नई में खेले जा रहे डब्ल्यूटीए 250 चेन्नई ओपन के क्वालीफाइंग मुकाबले में जूनागढ़ की इस युवा खिलाड़ी ने पोलैंड की पांचवीं वरीयता प्राप्त वेरोनिका फाल्कोव्स्का को कड़ी चुनौती दी। हालांकि जेन्सी मुकाबला जीतने में सफल नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने दूसरा सेट जीतकर और निर्णायक सेट में संघर्ष करके अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया।
दरअसल, जेन्सी कनाबर गुजरात के जूनागढ़ की रहने वाली हैं और इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस मुकाबले में हिस्सा लेना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। वह लगभग 2 हजार किलोमीटर की यात्रा करके चेन्नई पहुंची थीं। खास बात यह है कि शुरुआत में उनका नाम टूर्नामेंट की मूल क्वालीफाइंग सूची में भी शामिल नहीं था। लेकिन भारतीय खिलाड़ी श्रीवल्ली भामिदिपति के सीधे क्वालीफाइंग ड्रॉ में प्रवेश करने के बाद जेन्सी को आखिरी समय पर वाइल्ड कार्ड के जरिए खेलने का मौका मिला। इस अवसर को उन्होंने पूरी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ भुनाने की कोशिश की।
मुकाबले की शुरुआत जेन्सी के लिए आसान नहीं रही। पोलैंड की अनुभवी खिलाड़ी वेरोनिका फाल्कोव्स्का ने पहले सेट में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और 6-2 से सेट अपने नाम कर लिया। शुरुआत में जेन्सी को अपनी प्रतिद्वंद्वी की तेज और सटीक रणनीति का सामना करना पड़ा। अनुभव के मामले में काफी अंतर होने के बावजूद भारतीय खिलाड़ी ने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे सेट में शानदार वापसी की।
दूसरे सेट में जेन्सी ने अपने खेल में सुधार करते हुए वेरोनिका को लगातार चुनौती दी। दोनों खिलाड़ियों के बीच कई रोमांचक रैलियां देखने को मिलीं। जेन्सी ने दबाव के क्षणों में भी संयम बनाए रखा और आखिरकार 7-5 से दूसरा सेट जीतकर मुकाबले को निर्णायक तीसरे सेट तक पहुंचा दिया। इस दौरान उन्होंने दिखाया कि कम उम्र होने के बावजूद बड़े मंच पर दबाव का सामना करने की क्षमता उनमें मौजूद है।
हालांकि तीसरे सेट में पोलैंड की खिलाड़ी ने अपने अनुभव का इस्तेमाल किया और मुकाबले पर दोबारा पकड़ बना ली। जेन्सी ने कई मौकों पर वापसी की कोशिश की, लेकिन निर्णायक क्षणों में वेरोनिका ने बेहतर खेल दिखाया। आखिरकार तीसरा सेट 6-3 से जीतकर उन्होंने मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस तरह जेन्सी को 2-6, 7-5, 3-6 से हार का सामना करना पड़ा। यह मुकाबला लगभग 2 घंटे 22 मिनट तक चला।
मैच के बाद जेन्सी कनाबर ने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिद्वंद्वी के पास उनसे ज्यादा अनुभव था और वह खेल की गति को अपनी जरूरत के अनुसार बदल सकती थीं। कभी तेज तो कभी धीमी गति से खेलकर मुकाबले की स्थिति बदलना अनुभवी खिलाड़ियों की खासियत होती है। जेन्सी ने कहा कि इस मुकाबले से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला है और अगली बार वह इससे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी।
इस मुकाबले की खास बात यह भी रही कि जेन्सी भारत की उन युवा खिलाड़ियों में शामिल हैं, जो कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय टेनिस के बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। वह बाएं हाथ से खेलने वाली भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ियों में भी शामिल हैं। उनके प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि भारतीय महिला टेनिस में नई प्रतिभाएं लगातार उभर रही हैं।
चेन्नई ओपन के क्वालीफाइंग मुकाबलों में अन्य भारतीय खिलाड़ियों को भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। श्रीवल्ली भामिदिपति और जील देसाई को भी अपने मुकाबलों में हार मिली। वहीं वाइल्ड कार्ड से खेलने वाली दिया रमेश को जापान की क्योका ओकामुरा ने हराया। इस तरह भारतीय खिलाड़ियों के लिए क्वालीफाइंग दौर चुनौतीपूर्ण रहा।
भले ही जेन्सी कनाबर चेन्नई ओपन के अगले दौर में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन पांचवीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी के खिलाफ उनका प्रदर्शन भारतीय टेनिस के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करना उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब सभी की नजर इस युवा खिलाड़ी के आगामी टूर्नामेंट और प्रदर्शन पर रहेगी।


