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Agni-6 पर पाकिस्तान की कोशिश नाकाम! अमेरिकी रक्षा सचिव ने दिया भारत के समर्थन का संकेत

दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में मिसाइल क्षमता हमेशा चर्चा का प्रमुख विषय रही है। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान की एक पत्रकार द्वारा भारत की अग्नि-6 मिसाइल को लेकर उठाए गए सवाल और उस पर अमेरिकी रक्षा सचिव की प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी पत्रकार तंजीला खलील ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया कि यदि पाकिस्तान की संभावित इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) क्षमता को अमेरिका के लिए खतरा माना जाता है, तो फिर भारत की अग्नि-6 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों को किस नजर से देखा जाता है।

पत्रकार ने अपने सवाल में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें पाकिस्तान की भविष्य की मिसाइल क्षमताओं को अमेरिका के लिए संभावित चुनौती बताया गया था। सवाल के जरिए भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और उसकी वैश्विक पहुंच को लेकर चिंता जताने की कोशिश की गई।

हालांकि अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने जवाब देते हुए संतुलित और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका उन देशों के आत्मरक्षा के अधिकार का सम्मान करता है जो अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रक्षा क्षमताओं का विकास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भारत को एक जिम्मेदार और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। यही कारण है कि भारत की रक्षा और मिसाइल क्षमताओं को लेकर अमेरिका का दृष्टिकोण पाकिस्तान की तुलना में अलग दिखाई देता है।

भारत की अग्नि-6 मिसाइल को देश के सामरिक कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसकी संभावित लंबी दूरी और आधुनिक तकनीक भारत की रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है। हालांकि अग्नि-6 से जुड़ी कई तकनीकी जानकारियां अभी सार्वजनिक रूप से सीमित हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक मंच पर भारत की छवि एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में मजबूत हुई है। वहीं पाकिस्तान द्वारा भारत की सैन्य क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनाने की कोशिश को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती सामरिक ताकत क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी वजह से दुनिया के कई प्रमुख देश भारत को इंडो-पैसिफिक और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में अहम साझेदार के रूप में देख रहे हैं।

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