देश में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब ऑटोमोबाइल बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती लागत के कारण उपभोक्ता अब पारंपरिक वाहनों की जगह ईंधन-किफायती और वैकल्पिक पावरट्रेन वाले वाहनों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। यह जानकारी ऑटोमोबाइल डीलरों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (FADA) की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है।
फाडा के अनुसार मई 2026 में देश में कुल मोटर वाहन खुदरा बिक्री 9.55 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 25,31,067 इकाई तक पहुंच गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 23,10,451 इकाई था। विशेष बात यह रही कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी, भीषण गर्मी और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद वाहन बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती ईंधन लागत के बाद ग्राहकों ने फ्यूल-एफिशिएंट और वैकल्पिक पावरट्रेन विकल्पों में अधिक रुचि दिखाई। इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री पर देखा गया, जहां बाजार हिस्सेदारी 6.11 प्रतिशत से बढ़कर 9.25 प्रतिशत तक पहुंच गई।
यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। मई 2026 में यात्री वाहन बिक्री 23.25 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 4,02,591 इकाई रही, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह आंकड़ा 3,26,656 इकाई था। वहीं दोपहिया वाहनों की बिक्री 7.54 प्रतिशत बढ़कर 18,44,947 इकाई पर पहुंच गई।
तिपहिया और वाणिज्यिक वाहनों के क्षेत्र में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। तिपहिया वाहनों की बिक्री 3.56 प्रतिशत बढ़कर 1,11,526 इकाई रही, जबकि वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 5.29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 83,823 इकाइयों तक पहुंच गई।
फाडा का कहना है कि आने वाले महीनों के लिए ऑटोमोबाइल उद्योग का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। जून से अगस्त की अवधि के लिए करीब 59 प्रतिशत डीलरों ने बिक्री में वृद्धि की उम्मीद जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की प्रगति, ग्रामीण आय में संभावित वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों में सुधार वाहन बाजार को और मजबूती दे सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता केवल ईंधन की महंगाई का परिणाम नहीं है, बल्कि पर्यावरण जागरूकता, बेहतर तकनीक और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार भी इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण हैं। यही वजह है कि भारतीय उपभोक्ता अब लंबी अवधि की बचत और कम परिचालन लागत को ध्यान में रखते हुए EV विकल्पों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, मई 2026 के आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने ग्राहकों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है और इलेक्ट्रिक तथा ईंधन-किफायती वाहनों की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है।


