प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया फ्रांस दौरा भारत की विदेश नीति और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, व्यापार और वैश्विक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत और फ्रांस के बीच नई सहमतियां बनी हैं।
दौरे के अंत में फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने राजनयिक परंपराओं से हटकर प्रधानमंत्री Narendra Modi के लिए हिंदी में विशेष विदाई संदेश जारी किया, जिसने दोनों देशों की मजबूत होती दोस्ती को और उजागर किया।
13 जून को फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नीस शहर का दौरा किया और राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में बड़ी चर्चा हुई, जिसमें भारत द्वारा फ्रांस की कंपनी से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की संभावित योजना भी शामिल रही।
दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करते हुए इसे एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई।
स्पेस सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग
भारत और फ्रांस ने अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों ने स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस यानी अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों की निगरानी, महत्वपूर्ण सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
इसके अलावा मानव अंतरिक्ष मिशन और निजी अंतरिक्ष कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर भी बातचीत हुई।
AI और नई तकनीकों पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटेरियल्स को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकें बताया।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में मानव सभ्यता का अगला अध्याय इन्हीं तकनीकों के जरिए लिखा जाएगा और इनके साथ नई जिम्मेदारियां भी जुड़ी होंगी।
व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
भारत और फ्रांस ने अगले पांच वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी है।
दोनों देशों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने का भी समर्थन किया। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
मोदी और ट्रंप की मुलाकात भी रही खास
फ्रांस के एवियन-लेस-बैन्स में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात भी चर्चा का विषय रही।
करीब 16 महीनों के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ, रूसी तेल खरीद और अन्य मुद्दों को लेकर कई मतभेद सामने आए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा मिल सकती है।
UK के साथ भी बढ़ी साझेदारी
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने पर भी सहमति जताई।
दोनों देशों ने घोषणा की कि यह समझौता 15 जुलाई से लागू किया जाएगा, जिससे व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, जिसने रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष और वैश्विक साझेदारी के कई नए रास्ते खोल दिए हैं।


